अपने गौरवशाली इतिहास को हमने भुला दिया – स्वामी चन्द्रा

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नैनीताल l वीर बाल दिवस के अवसर पर ब्लूमिंग बड्स स्कूल, रा.प्रा.वि.- डोभालवाला, रा.प्रा.वि.-इन्दिरा कालोनी, रा.प्रा.वि. चुक्खूवाला-1, रा.इं.का.- डोभालवाला की कक्षा-7 में सामाजिक कार्यकर्ता एवं नगर सेवा प्रमुख, केशव नगर (आर.एस.एस.) द्वारा वीर बाल दिवस के अवसर पर साहिबजादों की शौर्य गाथा पर एक बौधिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया,
मुख्यवक्ता स्वामी एस. चन्द्रा (सामाजिक कार्यकर्ता), ने वीर बाल दिवस मनाने की ज़रुरत पर अपनी बात रखते हुये कहा 21 दिसम्बर से 27 दिसम्बर तक इन्हीं 7 दिनों में गुरु गोविंद सिंह जी का पूरा परिवार शहीद हो गया था। उसी रात माता गूजरी ने भी ठन्डे बुर्ज में प्राण त्याग दिए। यह सप्ताह भारत के इतिहास में ‘शोक सप्ताह‘ होता है, शौर्य का सप्ताह होता है।
पूस का 13वां दिन. नवाब वजीर खां ने फिर पूछा…. बोलो इस्लाम कबूल करते हो? 6 साल के छोटे साहिबजादे फ़तेह सिंह ने नवाब से पूछा…. अगर मुसलमाँ हो गए तो फिर कभी नहीं मरेंगे न? वजीर खां अवाक रह गया….उसके मुँह से जवाब न फूटा तो साहिबजादे ने जवाब दिया कि जब मुसलमाँ हो के भी मरना ही है, तो अपने धर्म में ही अपने धर्म की खातिर क्यों न मरें? दोनों साहिबजादों को ज़िंदा दीवार में चिनवाने का आदेश हुआ.. दीवार चिनी जाने लगी। जब दीवार 6 वर्षीय फ़तेह सिंह की गर्दन तक आ गयी तो 9 वर्षीय जोरावर सिंह रोने लगा…फ़तेह ने पूछा, जोरावर रोता क्यों है? जोरावर बोला, रो इसलिए रहा हूँ कि आया मैं पहले था पर कौम के लिए शहीद तू पहले हो रहा है……
गुरु साहब का पूरा परिवार 6 पूस से 13 पूस… इस एक सप्ताह में कौम के लिए धर्म के लिए राष्ट्र के लिए शहीद हो गया ।
दोनों बड़े साहिबजादों, अजीत सिंह और जुझार सिंह जी का शहीदी दिवस !
स्वामी ने कहा पहले पंजाब में इस हफ्ते सब लोग ज़मीन पर सोते थे क्योंकि माता गूजरी ने 25 दिसम्बर की वो रात दोनों छोटे साहिबजादों के साथ नवाब वजीर ख़ाँ की गिरफ्त में सरहिन्द के किले में ठंडी बुर्ज़ में गुजारी थी और 26 दिसम्बर को दोनो बच्चे शहीद हो गये थे। 27 तारीख को माता ने भी अपने प्राण त्याग दिए थे। लेकिन, अंग्रेजों की देखा-देखी पगलाए हुए हम भारतीयों ने गुरु गोविंद सिंह जी की कुर्बानियों को सिर्फ 300 साल में भुला दिया। ये बड़े शर्म की बात है कि हमने अपने गौरवशाली इतिहास को भुला दिया और यही मूल कारण है कि हम ग़ुलाम बने।
इस अवसर पर प्रधानाचार्य वसंत कुमार, श्रीमती ममता उनियाल, श्रीमती उषा थापलियाल, श्रीमती ज्योत्सना नैथानी, श्रीमती ममता रतूरी, श्रीमती अर्चना रूहेला, श्रीमती अनुराधा सुन्द्रियाल ने बच्चों को एतिहासिक जानकारी देने के लिए स्वामी का आभार व्यक्त किया.

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