पारंपरिक लोक चित्रकार बृजमोहन जोशी ने गीत एवं नाटक प्रभाग के सेवानिवृत्त कलाकारों से बातचीत की

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हल्द्वानी। सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के नैनीताल केन्द्र से सेवानिवृत्त कलाकार महेश चन्द्र जोशी, जसी राम, हरीश पंंत के साथ आज महेश चन्द्र जोशी के आवास पर एक भेंट वार्ता में सहभागीता करने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ।
जिसमें जसी राम ने कहा कि नैनीताल में किस प्रकार गीत एवं नाटक प्रभाग कि स्थापना हुई तथा स्व. बृजेन्द्र लाल साह के बहुमूल्य योगदान को याद करते हुए उन्होंने अपनी बात आगे बढ़ाई उन्होंने कहा कि सबसे पहले गीत एवं नाटक प्रभाग का कार्यालय अयारपाटा हर्टन काटेज में था उसके बाद वह अयारपाटा एवरी वीला में तथा उसके बाद राजमहल कम्पाउन्ड मल्लीताल में रहा। उन्होंने उस समय के उन तमाम अधिकारियों व कलाकारों को भी याद किया । महेश चन्द्र जोशी ने कहा कि एक दौर गीत एवं नाटक प्रभाग का ऐसा दौर था जिसमें विभाग के अधिकारियों व कलाकारों ने आरम्भ में किस प्रकार पहाड़ी दुर्गम क्षेत्रों में कई – कई किलोमीटर दूर अपना सामान (बिस्तर बन्द, तथा अन्य सामान) पैदल चलकर के उसे खुद ले जाकर अपनी प्रस्तुतियां दी। यह विभाग के सभी अधिकारियों व कलाकारों कि मेहनत का ही असर था कि एक समय गीत एवं नाटक प्रभाग का स्वर्णिम समय भी रहा।
हरीश पंत ने उन लम्हों को याद करते हुए कहा कि मुझे आज भी वो प्रस्तुतियां वो माहौल याद आता है कि जनता में किस प्रकार शरदोत्सव को लेकर, गीत एवं नाटक प्रभाग के कार्यक्रमों को देखने के लिए, और आल इण्डिया ट्रेडस कप हॉकी टूनामैंट को देखने वालो कि क्या दिवानगी होती थी । स्व. पी.डी. पन्त, स्व .जाकिर भारती हाकी मैच का आंखों देखा हाल सुनाते थे। राम सिंह का बैण्ड वादन होता था। आज कि इस भेंट वार्ता में शहर के ऐसे अनगिनत फनकारों का स्मरण भी हो आया। जोशी जी ने कहा कि रामलीला में हास्य कलाकार (जोकर) वहीं कार्य होता था जैसे भोजन करते समय चटनी का ,वहीं काम रामलीला में जोकर करते थे । जिसमें मल्लीताल रामलीला में स्व. लच्छी पाण्डे , सुखाताल में पीताम्बर भट्ट ,, मल्लीताल शबरी का अभिनय करने वाले पान वाले स्व. नत्थी लाल साह , कैकेई व सूर्पनखा का अभिनय स्व .दिनेश चंद्र जोशी (कन्नू उस्ताद), पूष के पहले रविवार से कई वर्षों तक अपने आवास में होली कि बैठक आयोजित करने वाले स्व.के.के.साह , प्रदर्शन कला के मर्मज्ञ स्व.रमेश चन्द्र जोशी , गुरु स्व.शरद चन्द अवस्थी स्व. विश्वभर नाथ साह जैसे अनेक हस्तियों का भी स्मरण हो आया। महेश चन्द्र जोशी ने कहा कि आज दुःख का विषय है कि गीत एवं नाटक प्रभाग नैनीताल केन्द्र के कलाकार अपनी इन प्रस्तुतियों को सिखलाना चाहते हैं किन्तु कोई सिखना ही नहीं चाहता है जोशी जी ने कहा कि उन तमाम प्रस्तुतियों को आज जिन्हें दिन-रात कि मेहनत करने के बाद तैयार किया गया था उन्हें आज कैसे जीवित रखा जा सकता है, उन्हें कैसे संरक्षित किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि इस कार्य को करने का प्रयास करना नितान्त आवश्यकीय है श्री जसी रामजी ने भी यही चिन्ता जताई।
जोशी ने कहा कि वो इस विषय में अपने विभाग के साथी कलाकारों से सम्पर्क कर यथा शीघ्र अगली बैठक में इस सम्बन्ध में पुनः विचार विमर्श करेंगे। जसी राम , हरीश पंंत ने पूर्ण सहयोग करने कि बात कही।
महेश चन्द्र जोशी के संकलन में से गीत एवं नाटक प्रभाग के फनकार स्व. गोविन्द लाल ,स्व. धर्म सिंह दिगारी को उनके बहुमूल्य योगदान के लिए याद किया गया।

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