डी.एस.बी. परिसर में गूँजे बैठकी होली के स्वर, विद्यार्थियों ने जाना शास्त्रीय परंपरा का मर्म

नैनीताल। डी.एस.बी. परिसर स्थित संगीत विभाग में कुमाऊँनी बैठकी होली की समृद्ध शास्त्रीय परंपरा पर आधारित सांस्कृतिक–संवादात्मक कार्यक्रम “Echoes of Kumauni Holi: A Dialogue Between Tradition and Melody” का सफल आयोजन किया गया। कार्यक्रम के माध्यम से विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं को बैठकी होली की ऐतिहासिक, सांगीतिक एवं सांस्कृतिक आयामों से अवगत कराया गया।कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक दीप प्रज्वलन के साथ हुआ। तत्पश्चात संगीत विभाग के छात्र-छात्राओं ने विभागाध्यक्ष डॉ. रवि जोशी के निर्देशन में पंडित चारू चंद्र पांडे द्वारा रचित प्रसिद्ध होली “बुराँसी को फूलों को कुमकुम मारो” तथा एक पारंपरिक महिला होली की प्रस्तुति देकर वातावरण को पूर्णतः फागुनमय बना दिया।इस अवसर पर कुमाऊँनी होली परंपरा के प्रतिष्ठित साधक श्री नंदन जोशी एवं श्री अरुण पांडे ने शास्त्रीय होली की ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं संगीतात्मक विशेषताओं पर प्रकाश डाला।संवाद के उपरांत होली गायन की प्रस्तुति आरंभ हुई। श्री नंदन जोशी ने अपनी कर्णप्रिय एवं परंपरागत गायन शैली में राग आधारित होलियों की सुमधुर प्रस्तुति देकर वातावरण को शास्त्रीय गरिमा से भर दिया। उनकी स्वर-साधना, भावाभिव्यक्ति तथा पारंपरिक शैली की सहजता ने श्रोताओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। इसी क्रम में भौतिकी के शिक्षक रहे श्री अरुण पांडे ने पारंपरिक होलियों का सधा हुआ गायन प्रस्तुत किया, जिससे उपस्थित श्रोता एवं विद्यार्थी अत्यंत प्रभावित हुए। उपस्थित दर्शकों के विशेष अनुरोध पर वरिष्ठ होलियार श्री प्रभात शाह गंगोला ने अपने सुमधुर गायन से सत्र का समापन किया और वातावरण को रंगमय बना दिया। तबले पर संगत विभाग के शोधार्थी कमल जोशी द्वारा की गई, जिसने संपूर्ण कार्यक्रम को सशक्त लयात्मक आधार प्रदान किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के अनेक वरिष्ठ प्राध्यापक, शोधार्थी एवं गणमान्यजन उपस्थित रहे, जिनमें प्रो. लता पांडे, प्रो. ज्योति जोशी, प्रो. अनिल बिष्ट, प्रो. रीना साह, प्रो. संजय घिल्डियाल, प्रो. आलोक दुर्गापाल, डॉ. कपिल खुल्बे, प्रो. विमल पांडे, प्रो. सीमा पांडे, प्रो. एम.सी. जोशी, डॉ. जितेंद्र लोहनी, प्रो. एल.एस. लोधियाल, प्रो. नीलू लोधियाल, डॉ. कुबेर गिनती, डॉ. इरा तिवारी, प्रो. लज्जा भट्ट, प्रो. चंद्रकला रावत, डॉ. राजकुमार, डॉ. प्रकाश चन्याल, डॉ. शिवांगी चन्याल सहित अन्य प्राध्यापक उपस्थित थे। साथ ही संगीत विभाग के संकाय सदस्य डॉ. गगनदीप होती, डॉ. अशोक कुमार, डॉ. अलंकार महतोलिया, श्रीमती बबीता लोहानी एवं श्री वीरेंद्र की सक्रिय उपस्थिति ने आयोजन की गरिमा में वृद्धि की।सफल आयोजन की उपस्थित श्रोताओं ने भरपूर सराहना की तथा सुझाव दिया कि अपनी संस्कृति और कलाओं को प्रोत्साहन देने वाले ऐसे कार्यक्रम समय-समय पर आयोजित होते रहने चाहिए। कार्यक्रम का संचालन शोधार्थी कोमल पाठक द्वारा किया गया। यह आयोजन संगीत विभाग के विभागाध्यक्ष डॉ. रवि जोशी की परिकल्पना एवं नेतृत्व में संपन्न हुआ। उन्होंने कहा कि भविष्य में भी उत्तराखंडी संस्कृति पर आधारित ऐसे कार्यक्रमों का आयोजन निरंतर किया जाता रहेगा, जिससे हमारी समृद्ध सांस्कृतिक विरासत नई पीढ़ी तक प्रभावी रूप से पहुँच सके।