कुमाऊं विश्वविद्यालय के “देवदार सभागार” में बौद्धिक संपदा अधिकार संरक्षण पर हुआ संगोष्ठी का आयोजन नया भारत योजनाओं, उत्पादों, अभिकल्पना और खोज को पेटेंट कर विकसित भारत संकल्प 2047 की ओर तेजी से बढ़ रहा है- कुलपति प्रो० दीवान एस रावत

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नैनीताल | कुमाऊं विश्वविद्यालय के यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र के “देवदार सभागार” में बौद्धिक संपदा अधिकार संरक्षण पर संगोष्ठी का आयोजन किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता कुलपति कुमाऊँ विश्वविद्यालय प्रो० दीवान एस रावत द्वारा की गई एवं संगोष्ठी को मुख्य वक्ता के रूप में फार्मास्युटिकल उद्योग और शिक्षा जगत के स्वतंत्र सलाहकार एवं गोवा सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के संस्थापक प्रो0 उमेश वी० बनाकर द्वारा संबोधित किया गया। संगोष्ठी की अध्यक्षता करते हुए कुलपति प्रो० दीवान एस रावत ने कहा कि राज्य निर्माण के पश्चात हमने खेलकूद, गीत, संगीत, सिनेमा व थियेटर, साहित्य, फोटोग्राफी तथा निर्माण (तथा उत्पादन ) आदि क्षेत्रों में अनेक उपलब्धियां हासिल की। परन्तु कभी-कभी ऐसे मामले भी देखने को मिलते हैं कि हमारी कला, संस्कृति एवं साहित्य की नकल हो जाती है एवं असली रचनाकार को उसका अधिकार नहीं मिल पाता। अतः हमारा प्रयास है कि कार्यशाला के माध्यम से अधिक से अधिक लोगों को बौद्धिक संपदा अधिकार संरक्षण के संबंध में शिक्षित किया जाए। कुलपति प्रो० रावत ने कहा कि डिजिटल युग में हम सभी को आईपीआर के बारे में जानकारी होनी चाहिए, क्योंकि यह एक ऐसा विषय है जिससे मानव जीवन हमेशा जुड़ा रहता है। उन्होंने वैदिक कालीन भारत में विज्ञान की प्रगति के विषय में जानकारी देते हुए कहा कि पेटेंट की व्यवस्था न होने से दूसरे देश हमारे वैदिक ज्ञान को विश्व के सामने पेश कर रहे हैं। कुलपति प्रो० रावत ने कहा कि आज विकसित एवं विकासशील देशों की ग्रोथ में फर्क सिर्फ इतना है कि विकसित देश अपनी बौद्धिक संपदाओं को बहुत पहले से ही कॉपी राइट, पेंटेंट एवं ट्रेडमार्क जैसी फुलप्रूफ स्क्यिोर तकनीक द्वारा सुरक्षित करके पूरी दुनिया पर राज करते रहे हैं। उन्होंने कहा आज भारत में भी प्रत्येक विभाग में देश के वैज्ञानिक, शोधार्थी, औद्योगिक इकाईयों, शिक्षण संस्थान, सरकारी संस्थाएं अपनी योजनाओं एवं अपने उत्पादों को पेटेंट कर विकसित भारत संकल्प 2047 की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं। संगोष्ठी के मुख्य वक्ता एवं गोवा सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी के संस्थापक प्रो0 उमेश वी० बनाकर ने अपने पॉवर पॉइंट प्रेजेंटेशन के माध्यम से समझाया कि बौद्धिक संपदा का अधिकार किसी आविष्कार एवं सृजनात्मक गतिविधियों के आधार पर प्रदान किया जाता है। आपके विचार, लेख, शोधपत्र, नवीन डिजाइन, नई खोज, आर्टिकल आईपीआर के तहत आते हैं। प्रो0 उमेश वी० बनाकर ने बौद्धिक संपदा अधिकार क्या है? पेटेंट क्या है, डिजाइन क्या है? इन विषय वस्तुओं को सुस्पष्ट करते हुए पेटेंट कार्यालय, उनका गठन, उनकी कार्यशैली, पेटेंट और डिजाइन प्रार्थना पत्र देने, विहित शुल्क भुगतान करने की प्रक्रिया, उस पर आपत्ति प्रस्तुत किये जाने और आपत्ति के निस्तारण और अन्ततः पंजीकरण के प्रक्रिया के विषय मे विस्तार पूर्वक चर्चा की। इस अवसर पर गोवा सेंटर फॉर एक्सीलेंस इन इंटेलेक्चुअल प्रॉपर्टी की समन्वयक डॉ० राजश्री गुडे ने प्रतिभागियों को किसी नवीन उत्पाद के पेटेंट प्राप्त करने के लिए किन-किन प्रक्रियाओं से गुजरना पड़ता है, किन- किन सावधानियों का ध्यान रखना पड़ता हैं, उत्पाद के विशिष्टियों तथा उन्हें पूर्व पंजीकृत पेटेंट से किस प्रकार भिन्न और विशिष्ट किया जा सकता है?, इन समस्त विषयों एवं प्रक्रियाओं को समझाया। इसी के साथ संगोष्ठी में वक्ताओं द्वारा शोधार्थियों के साथ नवीनतम रुझानों, चुनौतियों, बौद्धिक संपदा अधिकारों से संबंधित नवाचार पर चर्चा की गई। इससे पूर्व आई०पी०आर० सेल की समन्वयक एवं इस संगोष्ठी की संयोजक प्रो० बीना पाण्डेय द्वारा सभी अतिथियों एवं वक्ताओं का स्वागत करते हुए बताया कि आई०पी०आर० सेल का उद्देश्य संकाय सदस्यों और छात्रों के बीच बौद्धिक संपदा अधिकारों (आईपीआर) के बारे में जागरूकता पैदा करना और शिक्षित करना है। कार्यक्रम का सञ्चालन यूजीसी-मालवीय मिशन शिक्षक प्रशिक्षण केंद्र की निदेशक प्रो० दिव्या उपाध्याय द्वारा किया गया। इस अवसर पर संकायाध्यक्ष वाणिज्य प्रो० अतुल जोशी, निदेशक शोध एवं प्रसार प्रो० एन०के० साहू, डॉ० ऋषेंद्र कुमार, डॉ० तरुण जोशी, डॉ० नगमा के साथ ही समस्त शोधार्थी उपस्थित रहे।

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