विज्ञान सभी के लिए इस उद्देश्य को समर्पित स्पेक्स देहरादून का अभियान “रसायन रंग मुक्त होली,प्राकृतिक रंग संग होली”

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देहरादून l इस अभियान को स्पेक्स विगत कई वर्षों से करता आ रहा है। इस वर्ष भी स्पेक्स द्वारा विभिन्न विद्यालयों में प्राकृतिक रंग बनाने के विज्ञान की प्रक्रिया की जानकारी साझा की गई। जिसमें स्पेक्स ने राजकीय पूर्व माध्यमिक विद्यालय पंडित वाडी,राजकीय प्राथमिक विद्यालय केहरी गांव, पूर्व माध्यमिक विद्यालय लोअर कंडोली, प्राथमिक विद्यालय इन्दिरा कालोनी, रामप्यारी बालिका इंटर कॉलेज, काठबंगला स्थित बस्ती आर्यन सोसायटी , ग्रीन फील्ड स्कूल देहरादून सम्मिलित रहे। इन कार्यशालाओं को आयोजित करने का उद्देश्य होली के पवित्र त्यौहार पर रसायन युक्त रंगों के चलन को रोकना व प्राकृतिक रंगों के प्रति जागरूकता लाना रहा। इन आयोजित कार्यशालाओं में छात्र छात्राओं एवं विद्यालय के शिक्षक शिक्षिकाओं सहित अभिभावकों ने होली पर क्या करें और क्या न करें कि जिससे होली की गरिमा बनी रहे व हमारे शरीर पर रसायनिक रंगों का कम से कम दुष्प्रभाव पड़े । स्पेक्स द्वारा जानकारी साझा करते हुए बताया गया कि-

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  1. होली के दिन सुबह ही अपने शरीर पर नारियल का तेल या क्रीम अवश्य लगा लें, ये आपको रसायनिक रंगों से बचाने में सक्षम है। यह रंग के रसायन को त्वचा में जाने से रोकेगा तथा बाद में रंगो को धोने में भी आसानी होगी।
  2. अपने बालों में तेल लगायें ताकि रंगों की डाई आपके बाल तथा सिर की त्वचा को नुकसान ना पहुंचाये।
  3. ऐसे वस्त्र पहनें जो आपके शरीर के ज्यादातर भाग को ढक कर रखें। पूरे बाजू की शर्ट और पेन्ट के साथ ही जुराब पहन लें।
  4. यदि आंखों में रंग चला गया हो तो सादे पानी के खूब छींटे मारें तथा धूप के चश्मे का प्रयोग करें।5. प्राकृतिक व हर्बल रंगों से ही होली खेलें।
  5. होली खेलने के दौरान बार-बार अपना मुंह पानी से न धोयें, इससे त्वचा को नुकसान पहुंच सकता है।
  6. रंग छुड़ाने के लिये हल्के गर्म पानी का प्रयोग करें। रंग लगने से त्वचा सूखी हो जाती है।
  7. यदि कोई रंग न छूटे तो उसे दही व बेसन के लेप से छुटायें। होली पर क्या न करें
  8. आंँख, कान, नाक या खुले घाव पर रंग न लगने दें।
    2 गीले फर्श पर न भागें, आप फिसल सकते हैं।
  9. सिंथेटिक रंग न खरीदें।
  10. तला भुना भोजन व मिठाई न खाएँ, इससे त्वचा पर फुंसिया निकल सकती हैं।
  11. रंगो को न सुंघे, सांस लेने में गतिरोध पैदा हो सकता है।
  12. यदि आपने भांग या शराब पी हो तो गाड़ी कदापि न चलायें।
  13. यदि आपको भांग का नशा हो जाये तो मीठा व चाय आदि का प्रयोग लगभग 6 घंटे तक न करें। चाय या मीठा खाने से नशा और अधिक हो जायेगा।
    8 घर पर ही रंग बनाकर होली मनाई जा सकती है। इन रंगों को बनाना बहुत ही सरल व किफायती है। यह रंग निम्न प्रकार से बनाए जा सकते हैं –
    हरा रंग – मेंहदी का प्रयोग करें।
    शुद्ध मेंहदी का आंवले के साथ मिश्रण करें जिससे भूरा रंग बनेगा। सूखी मेंहदी आपके चेहरे पर रंग नहीं छोडे़गी व गुलाल के स्थान पर इस्तेमाल कर सकती है। यदि इसी मेंहदी को पानी के साथ मिलायेंगें तो वह आपके चेहरे पर हल्का सा रंग छोड़ेगी।
  14. गुलमोहर की हरी पत्तियों को पीसकर भी हरा रंग बनाया जा सकता है।
  15. पोदीना, पालक, धनिया पीसकर हरा रंग पानी के साथ बनाया जा सकता है। हल्दी तथा बेसन मिलाकर पीला रंग बनाया जा सकता है तथा उबटन के रूप में प्रयोग किया जा सकता है। कस्तूरी हल्दी का प्रयोग करें जो खुशबुदार है। साथ ही उसमें उपचारात्मक गुण भी है। बेसन में मुल्तानी मिट्टी का पाउडर भी डाल सकते हैं।
  16. अमलतास के फूल, गेंदा तथा पीले रंग की गुलदावरी के फूल भी पीले रंग के लिये प्रयोग में लाये जा सकते हैं। इन्हें पानी में भिगोकर रखें तथा उबाल कर रात भर के लिये छोड़ दें।
    लाल रंग – लाल चन्दन पाउडर का प्रयोग कर लाल रंग बनाये । अनार के छिलके पानी में उबालने से लाल रंग बनाया जाये। बुरांश के फूलों से लाल रंग बन सकता है। लाल गाजर तथा टमाटर के रस को निकाल कर लाल रंग बनायें।
    नीला रंग – नील का पौधे पर लगने वाला फल पानी में मिलाकर नीला रंग बना सकते हैं।
    चुकुन्दर को काट कर उसे एक लीटर पानी में भिगो देने से सुन्दर रानी (मजेन्टा रंग) रंग बनता है। उसे उबाल कर छान लें।
    *गुलाबी रंग – कचनार के फूल पानी में रात भर भिगोंये तथा उबाल लें इससे अच्छा गुलाबी रंग प्राप्त हो सकता है।
    *केसरिया रंग -* टेसू या पलाश के फूल रात भर पानी में भिगोकर रखें तथा उबाल लें। पारम्परिक होली में टेसू के फूलों का अपना ही महत्व है। भगवान कृष्ण ने भी टेसू के फूलों से होली खेती थी। टेसू का फूल मार्च में माह में ही खिलता है तथा इसमें कई औषधीय गुण भी हैं। हर सिंगार के फूलों को पानी में भिगोने से नारंगी रंग मिलता है।
    केसर पानी में भिगोकर कुछ घन्टों के लिये छोड़ दें तथा बाद में पीस लें, मंहगा है पर त्वचा के लिये बेहद अच्छा है।
    भूरा रंग – भूरे रंग हेतु कत्थे को पानी में मिलायें तथा भूरा रंग बनायें। चाय या काफी को पानी में मिला कर भूरा रंग बनाया जा सकता है। सूखा आंवला पानी में रात भर भिगाकर भूरा रंग बन सकता है। प्रशिक्षकों द्वारा बताया गया कि घरेलू तरीके से इस प्रकार के रंग किसी भी तरह से हमारे स्वास्थ्य को हानि नहीं पहुंचाते। इन रंगों को आसानी से धोकर साफ किया जा सकता है। बाजार में बिकने वाले रंगों के प्रयोग से एलर्जी, शरीर में खुजली, त्वचा में रूखापन आदि की शिकायतें आम तौर पर सुनाई देती हैं। कई बार इन रंगों के प्रयोग से कैंसर जैसे जटिल रोग भी हो जाते है। स्पेक्स के इस अभियान में अभी तक विभिन्न विद्यालयों के लगभग 1000 सामान्य छात्रों सहित 97 दिव्यांग छात्र , छात्राओं ,25 शिक्षक व 46 अभिभावको की अभियान में सक्रिय भागीदारी रही है।
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