“त्याग की प्रतिमूर्ति आर्य सन्यासी”मान अपमान से ऊपर उठना ही सन्यास है-आचार्य चन्द्रशेखर शर्मा

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नैनीताल l केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में “तप त्याग की प्रतिमूर्ति आर्य सन्यासी ” विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया I य़ह करोना काल से 642 वां वेबिनार था I

वैदिक विद्वान आचार्य चन्द्र शेखर शर्मा (ग्वालियर) ने आर्य समाज के 25 वीतराग सन्यासियों की चर्चा करते हुए कहा कि जो मान अपमान से ऊपर उठ जाए वही सच्चा सन्यासी है I उन्होंने विविध भावों के साथ ओजस्वी वाणी में विषय का प्रतिपादन करते हुए कहा।
“1- संन्यास का अर्थ एवं भाव-“
1- सम् एवं नि उपसर्ग पूर्वक आस् धातु के साथ “संन्यास” शब्द सिद्ध होता है।
2- सम्यक् रुप से न्यास करना ही ” संन्यास” है।
3- पुत्रैषणा,वित्तैषणा एवं लोकैषणा का पूर्ण परित्याग करना ही ” संन्यास “ है।
4- यज्ञोपवीत के बाह्यसूत्र को छोड़कर ब्रह्मसूत्र और ब्रह्मभाव को धारण करना ही ” संन्यास” है।
5- बाह्य शिखा को छोड़कर ज्ञानशिखा को धारण करना ही ” संन्यास” है।
6- प्रबल वैराग्य, धर्मोपदेश,सत्योपदेश एवं प्राणी मात्र परम हित,परोपकार ही ” परिव्राजक” का परम स्वरूप है।
” तप का अर्थ एवं भाव”
द्वन्द्वों का सहन करना ही तप है। ” द्वन्द्वसहिष्णुत्वं तपः” का यही भाव है।
सर्दी-गर्मी,मान-अपमान,सुख-दुःख,लाभ-हानि,जय-पराजय,निंदा-प्रशंसा एवं मित्रता-शत्रुता में समभाव रखना ही ” तप” है।
“3- त्याग का अर्थ एवं भाव-“
संन्यास के धारण में “त्याग” की पराकाष्ठा है।अपने परिवार का, धन का,क्रोध का, मोह का,आसक्ति का त्याग,अभिमान का त्याग,प्रशंसा का त्याग और दुर्वृत्तियों का त्याग करना ही ” परम त्याग” है।
“4- प्रमुख 25 आर्य संन्यासियों का वर्णन”
1- स्वामी विरजानन्द दण्डी,2- स्वामी दयानन्द सरस्वती,3- स्वामी श्रद्धानन्द,4- स्वामी दर्शनानन्द सरस्वती,5- महात्मा नारायण स्वामी,6- स्वामी स्वतंत्रतानन्द,7-स्वामी आत्मानन्द,8-महात्मा आनन्द स्वामी,9-स्वामी ध्रुवानन्द,10- स्वामी सर्वानन्द,11-स्वामी दीक्षानन्द,12-स्वामी सत्यप्रकाश सरस्वती,13- स्वामी ओमानन्द,14-स्वामी जगदीश्वरानन्द,15-स्वामी प्रणवानन्द,16- स्वामी सत्यपति,17-स्वामी धर्मानन्द,18- स्वामी सच्चिदानन्द,19-स्वामी विवेका नन्द,20- स्वामी शंकरानन्द,21- स्वामी वेदानन्द दण्डी,22- स्वामी वेदानन्द वेदवागीश,23-स्वामी मनीषानन्द,24-स्वामी जीवानन्द,25- स्वामी ओंकारानन्द आदि अनेक सन्यासियों के तपोमय एवं त्यागमय जीवनगाथा का विस्तृत विवरण दिया I
मुख्य अतिथि आर्य नेता सतीश नागपाल व अध्यक्ष ओम सपरा ने भी अपने विचार रखे I राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कुशल संचालन किया व राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया I आचार्य महेन्द्र भाई ने चर्चा को अद्भुत बताया I

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