शहीद प.रामप्रसाद बिस्मिल के 127वें जन्मोत्सव पर कृतज्ञ राष्ट्र की श्रद्धांजलि आर्य समाज की प्रेरणा सेबिस्मिल क्रांतिकारी बने-डॉ.जयेन्द्र आचार्यबिस्मिल का बलिदान देश सदा याद रखेगा -राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य

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नोएडा l आर्य समाज एवं आर्ष गुरुकुल नोएडा के तत्वावधान में सुप्रसिद्ध क्रांतिकारी अमर शहीद पं. रामप्रसाद बिस्मिल के 127वें जन्मोत्सव पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया I
वैदिक विद्वान डॉ.जयेन्द्र आचार्य ने कहा कि आर्य समाज की प्रेरणा से क्रान्तिकारी बने वह
सदैव युवाओ के प्रेरणा स्रोत रहेगे I उनका व्यक्तित्व अद्भूत था वह क्रांतिकारियों के लिए भी प्रेरणा पुंज थे I
उनके जन्मदिन पर हमें राष्ट्र रक्षा का संकल्प लेना चाहिए I वह अछे गीतकार लेखक भी थे I कार्यक्रम अध्यक्ष केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि पं० रामप्रसाद बिस्मिल क्रांतिकारियों के सिरमौर रहे, उनसे प्रेरणा पाकर अनेकों नोजवान स्वतंत्रता-आंदोलन में कूद पड़े।अशफाक उल्ला ख़ां और बिस्मिल की दोस्ती जगजाहिर थी एक कट्टर आर्य समाजी और एक कट्टर मुस्लिम,लेकिन राष्ट्र की बलिवेदी पर दोनों इकठ्ठे फांसी पर झूल गए इससे बड़ा सामाजिक समरसता का कोई ओर उदाहरण नहीं हो सकता।बिस्मिल ने देश की आजादी के लिए घर,परिवार सब छोड़ कर राष्ट्र के लिए सब कुछ होम कर दिया। बिस्मिल का बलिदान देश सदा रखेगा I फांसी से तीन दिन पहले जैल में लिखी आत्मकथा सबको पड़नी चाहिए I बहिन गायत्री मीना ने कहा कि बिस्मिल की जीवनी पढ़ कर रोंगटे खड़े हो जाते है,वास्तव मे उनके जीवन चरित्र को पाठ्यक्रम में पढ़ाने की आवश्यकता है जिससे नयी पीढ़ी उनके बलिदान से परिचित हो सके। कार्यक्रम का कुशल संचालन captain अशोक गुलाटी ने किया I
केन्द्रीय आर्य युवक परिषद
प्रान्तीय अध्यक्ष प्रवीण आर्य ने कहा कि बिस्मिल के जीवन का कण कण राष्ट्र के लिए समर्पित था,उनका जीवन युवाओं के लिए सदैव प्रकाश पुंज का कार्य करेगा।देश का दुर्भाग्य है कि बिस्मिल जैसे क्रांतिकारियों को इतिहास से विस्मृत करने का षडयंत्र किया गया और एक ही परिवार की पूजा अर्चना की गई, “उनकी तुर्बत पे नहीँ एक भी दिया,जिनके खून से जले थे चिरागे वतन।आज महकते हैं मकबरे उनके जिन्होंने बेचे थे शहीदों के कफन” इस अमर बलिदानी का जन्म 11 जून सन् 1897 को उत्तर प्रदेश के शाहजहाँपुर जिले में हुआ था। सुप्रसिद्ध गायक संगीता आर्य गीत, सीमा आर्य,
सुदर्शन चौधरी के ओजस्वी गीतों ने सभी मे उत्साह पैदा कर दिया। स्वामी यज्ञमुनि जी, मधु भसीन ने भी अपने विचार रखे I आचार्य महेन्द्र भाई, धर्मपाल आर्य,कुसुम भंडारी आदि उपस्थित थे I

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