सतत विकास के लिए कृषि, जैविक और एप्लाइड विज्ञान में वर्तमान दृष्टिकोण पर 9वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 3 दिनों के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल के हरमिटेज़ में देवदार सभागार मैं शुरू हो गया है

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नैनीताल l सतत विकास के लिए कृषि, जैविक और एप्लाइड विज्ञान में वर्तमान दृष्टिकोण पर 9वां अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन 3 दिनों के लिए कुमाऊं विश्वविद्यालय, नैनीताल के हरमिटेज़ में देवदार सभागार में आयोजित किया जा रहा है। सम्मेलन का उद्घाटन समारोह आज हर्मिटेज परिसर के देवदार सभागार में किया गया। इस कार्यक्रम में विभिन्न देशों से भी कई गणमान्य लोग शामिल हुए हैं। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि डॉ. लक्ष्मीकान्त, निदेशक वीपीकेएएस, अल्मोडा हैं। अपने उद्घाटन भाषण के दौरान उन्होंने टिकाऊ कृषि के विभिन्न पहलुओं पर ध्यान केंद्रित किया और स्थिरता और लाभप्रदता पर ध्यान केंद्रित किया। उन्होंने उत्तराखंड की जैव विविधता और इससे किसानों को होने वाले लाभ के बारे में चर्चा की। उन्होंने पहाड़ी कृषि की विभिन्न चुनौतियों जैसे गुणवत्तापूर्ण बीज की अनुपलब्धता, जलवायु परिवर्तन और सबसे महत्वपूर्ण जंगली जानवरों की क्षति के बारे में भी बात की। हंगरी के गणमान्य व्यक्तियों में डॉ. गबोर टाकौली ने भोजन की मात्रा से अधिक गुणवत्ता वाले भोजन के बारे में बात की और सफल कृषि में एकीकृत कीट प्रबंधन की भूमिका पर भी चर्चा की। उन्होंने यूरोपियन देशों में हो रही खेती की तकनीकों की जानकारी प्रदान करी।। इस अंतराष्ट्रीय सेमिनार के संयोजक डीन एग्रीकल्चर व एग्रोफ़ोरेस्ट्री कुमाऊँ विश्वद्यालय नैनीताल प्रो0 जीत राम जी ने कहा कि उत्तराखंड के परिपेक्ष्य में कृषि करना बहुत आवश्यक है। उन्होंने विशेष रूप से ड्रिप इर्रिगेशन के माध्यम से हिल एग्रीकल्चर को बढ़ावा देने पर जोर दिया।। आयोजक एग्रो एनवायरनमेंट डेवेलपमेंट सोसाइटी के चैयरमेन डॉ छत्रपाल ने सभी का स्वागत करते हुए इस अंतराष्ट्रीय सेमिनार की रूप रेखा प्रस्तुत की।। निदेशक डी इस बी परिसर नीता बोरा शर्मा ने कृषि क्षेत्र में महिलाओं की भूमिका और योगदान को अतुनलिय बताया।। संचालन करते हुए निदेशक विज़िटिंग प्रोफेसर ललित तिवारी जी ने कृषि की पुरानी एंव नई नीतियों पर प्रभाव डाला।। डॉक्टर संजय कुमार झा त्रिभुवन यूनिवर्सिटी नेपाल ने खेती पर नए प्रयोग एवं उसे आसान बनाने के लिए कई सुझाव दिए।। इस कार्यक्रम में कुलसचिव दिनेश चन्द्रा बतौर अतिथि शामिल हुए।। उद्धघाटन सत्र में सभी अतिथियों का शॉल व पुष्पगुच्छ प्रदान कर स्वागत किया गया।। दीप प्रज्वलन कर अंतराष्ट्रीय सेमिनार को प्रारंभ किया गया। कृषि एवं कृशिवानीकी संकाय कुमाऊँ विश्विद्यालय तथा एग्रो एनवायरनमेंट एंड डेवेलपमेंट सोसाइटी के संयुक्त तत्वावधान में इस अंतराष्ट्रीय सेमिनार का आयोजन किया गया है तथा रविवार को इस सेमिनार का समापन किया जाएगा।। आज तकनीकी सत्र में विभिन्न शोध कार्यों के लगभग 22 ओरल तथा 25 पोस्टर प्रेजेंटेशन सम्पादित किये गए।। इस मौके पर समस्त शोध कार्यों के सोवेनियर का विमोचन किया गया। तथा इस मौके पर प्रो जीत राम जी को फेलो ऑफ एग्रो एनवायर्नमेंटल डेवलोपमेन्ट सोसाइटी के पुरुस्कार से सम्मानित किया गया तथा उन्हें शॉल और प्रशस्ति पत्र प्रदान कर सम्मानित किया गया।। इस अंतराष्ट्रीय सेमिनार में प्रो चित्रा पांडे, प्रो पदम बिष्ट , प्रो अतुल जोशी , प्रो एम एस मावड़ी, प्रो रितेश शाह, प्रो हरीश बिष्ट, प्रो आशीष तिवारी, प्रो एल एस लोधियाल, प्रो लता पांडे, डॉ महेन्द्र राणा, डॉ लॉज़लों, डॉ दिव्या सिंह, डॉ बी एस कालाकोटी, डॉ जी सी एस नेगी, डॉ इरा तिवारी, डॉ श्रुति साह, डॉ नीता आर्या, डॉ नवीन चन्द्र, डॉ नंदन सिंह, डॉ कुबेर गिनती, डॉ बिजेन्द्र , डॉ मैत्रयी, डॉ प्रीति माथुर, डॉ वंदना, डॉ प्रियंका, डॉ दीक्षा, डॉ बबिता, डॉ रजनी, डॉ गगनदीप होती, डॉ दीपक कुमार, योगेश त्रिपाठी, इंदर रौतेला, आरिफ, शाहबाज, निर्मला, नीलम, कविता, दीपा, अम्बिका आदि मौजूद रहे।।

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