कुविवि के स्वामी विवेकानंद पीठ के तत्वाधान में “ब्रिजिंग द गैप: अन्सिएंट थॉट, मॉडर्न लाइफ” विषयक पर आयोजित हुई स्वामी विवेकानंद व्याख्यान माला

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नैनीताल l कुमाऊं विश्वविद्यालय नैनीताल के बुरांश सभागार में स्वामी विवेकानंद पीठ के तत्वाधान में “ब्रिजिंग द गैप: अन्सिएंट थॉट, मॉडर्न लाइफ” विषयक स्वामी विवेकानंद व्याख्यान माला का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का शुभारम्भ न्यूयॉर्क की वेदांत सोसाइटी के प्रमुख स्वामी सर्वप्रियानंद, प्रसिद्ध नेतृत्व वक्ता एवं प्रशिक्षक डॉ० राधाकृष्णन पिल्लई, निदेशक आईक्यूएसी प्रो० संतोष कुमार, एवं रामकृष्ण संप्रदाय के भिक्षु स्वामी वेदनिष्ठानंद द्वारा दीप प्रज्ज्वलित कर किया गया।कार्यक्रम के आरम्भ में इंटीग्रेटेड बी०एड० की छात्राओं द्वारा कुलगीत एवं स्वागत गीत की सुमधुर प्रस्तुति की गई तत्पश्चात स्वामी विवेकानंद पीठ के सचिव प्रो० अतुल जोशी द्वारा सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कुमाऊं विश्वविद्यालय द्वारा स्थापित विवेकानंद पीठ के कार्यों के सन्दर्भ में प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर कुमाऊं विश्वविद्यालय एवं एच०एन०बी० गढ़वाल विश्वविद्यालय के संयुक्त तत्वाधान में बनाई गई “स्वामी विवेकानंद का यात्रा परिपथ” नामक वृत्तचित्र फिल्म का प्रदर्शन किया गया।व्याख्यान माला में मुख्य अतिथि न्यूयॉर्क की वेदांत सोसाइटी के प्रमुख स्वामी सर्वप्रियानंद ने सरल और मनोरंजक ढंग से विद्यार्थियों को विवेकानंद के व्यक्तित्व व जीवन आदर्शों से अवगत कराया। उन्होंने कहा कि उन्नीसवीं और बीसवीं शताब्दी के संधि-काल में भारत के जिन तेजस्वी व्यक्तित्वों ने देश के गौरव को कीर्ति-शिखरों तक पहुंचाया और भारतीय जनता की सामाजिक, सांस्कृतिक और आध्यात्मिक उन्नति के लिए प्राण-पण से प्रयत्न किया, उनमें वीर संन्यासी विवेकानंद (12 जनवरी, 1863-4 जुलाई, 1902) सबसे अलग और विलक्षण हैं। ऐसा ओज, ऐसी भव्यता और धज कि उनके निकट जाने पर वे पहली बार में ही मोह लेते थे। कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए निदेशक आईक्यूएसी प्रो० संतोष कुमार ने स्वामी विवेकानन्द के जीवन के प्रसंग सुनाते हुए कहा कि स्वामी विवेकानन्द जी ने शिकागो में भारतीय आध्यात्म और संस्कृति को पूरे विश्व के सामने प्रतिष्ठित किया। वे चाहते तो अमेरिका में पाश्चात्य परिधान धारण कर अपना व्याख्यान दे सकते थे, लेकिन उन्हे अपनी संस्कृति पर गर्व था, इसलिए उन्होने भगवा वस्त्र धारण करके ही विश्वप्रसिद्ध व्याख्यान दिया था। उन्होंने कहा कि देश की युवा पीढी को देश की संस्कृति के प्रति गौरव का भाव रखते हुए अपने लक्ष्य निर्धारित कर उन्हे हासिल करने के लिए लगातार प्रयास करना चाहिए। यही स्वामी विवेकानन्द का सन्देश है। अपने सम्बोधन में प्रसिद्ध नेतृत्व वक्ता एवं प्रशिक्षक डॉ० राधाकृष्णन पिल्लई ने कहा कि स्वामी विवेकानंद ने कहा था कि व्यक्ति जैसा सोचता है वैसा हो जाता है। अतः जीवन में हमेशा सकारात्मकता का भाव रखते हुए नकारात्मकता को दूर रखना चाहिए। उन्होंने कहा कि स्वामी विवेकानंद अपने छोटे से जीवन में जो मानव कल्याण के कार्य और राष्ट्र धर्म का प्रचार किया उसने सम्पूर्ण विश्व को आश्चर्यचकित किया है। हमें गर्व होना चाहिए कि ऐसे व्यक्ति ने भारत भूमि में जन्म लिया था। प्रत्येक भारतवासी उनके आदर्शों के माध्यम से अपनी प्राचीन उत्कृष्ट संस्कृति के प्रति गौरवबोध का अनुभव कर सकें । व्याख्यान माला में रामकृष्ण संप्रदाय के भिक्षु स्वामी वेदनिष्ठानंद ने कहा कि विवेकानंद सिर्फ एक व्यक्ति न होकर एक ऐसा राष्ट्र-प्रतीक है, जिसमें सैकड़ों धधकती बिजलियां जिनमें समा गई हों। और इसीलिए उनके शब्द भीतर से हमें जगाते और कई इसीलिए उनके शब्द भीतर से हमें जगाते और कई बार नींद से झिंझोड़ते हुए-से लगते हैं, विवेकानंद का मतलब ही है, जागृति। उनके हर शब्द से मानो एक ही गूंज उठती है- ‘उत्तिष्ठित जाग्रत प्राप्य वरान्निबोधत। और इसीलिए निराशा और गुलामी के अंधेरे में सोए देश को जगाने में जितना काम अकेले विवेकानंद ने किया, उतना सैकड़ों लोग मिलकर भी नहीं कर सके। इस अवसर पर डॉ० जीवन उपाध्याय, डॉ० विनोद जोशी, डॉ० भूपेश चंद्र पंत, डॉ० अशोक उप्रेती, श्रीमती शिखा रतूड़ी, डॉ० पूजा जोशी, श्रीमती अंकिता आर्या, पंकज भट्ट आदि उपस्थित रहे।

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