विभिन्न मांगों को लेकर विद्यार्थी परिषद के कार्यकर्ताओं ने कुलपति को ज्ञापन सोपा

नैनीताल। अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (एबीवीपी) ने कुमाऊं विश्वविद्यालय में व्याप्त विभिन्न समस्याओं और छात्र हितों की अनदेखी के खिलाफ आवाज बुलंद की है। मंगलवार को परिषद के जिला संयोजक धीरज गरकोटी के नेतृत्व में एक प्रतिनिधिमंडल ने विश्वविद्यालय के कुलपति को ज्ञापन सौंपकर जल्द से जल्द उचित कार्रवाई की मांग की।
एबीवीपी ने ज्ञापन के माध्यम से मुख्य रूप से तीन ज्वलंत मुद्दों को उठाया है। परिषद की पहली प्रमुख मांग पीएचडी प्रवेश प्रक्रिया को लेकर है। उन्होंने वर्तमान में जारी विज्ञप्ति को निरस्त करने की मांग करते हुए कहा कि छात्र हितों को देखते हुए विश्वविद्यालय को स्वयं की पारदर्शी प्रवेश परीक्षा आयोजित करनी चाहिए। इसके अलावा, परिषद ने प्रयोगात्मक परीक्षा शुल्क (प्रैक्टिकल ड्राफ्ट) जमा करने की समय सीमा को बढ़ाने की वकालत की है। उन्होंने तर्क दिया कि वर्तमान समय सीमा बहुत कम है, जिससे दूरस्थ क्षेत्रों के छात्रों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
तीसरी और सबसे महत्वपूर्ण मांग नई शिक्षा नीति (NEP) के तहत पांचवें सेमेस्टर में अनुत्तीर्ण छात्रों के लिए ‘स्पेशल बैक’ परीक्षा आयोजित करने की है। परिषद का कहना है कि परीक्षा न होने की स्थिति में छात्रों का पूरा एक साल बर्बाद हो रहा है।
जिला संयोजक धीरज गरकोटी ने दो टूक शब्दों में कहा कि यदि विश्वविद्यालय प्रशासन ने इन मांगों पर सहानुभूतिपूर्वक विचार करते हुए शीघ्र सकारात्मक निर्णय नहीं लिया, तो एबीवीपी छात्र हितों की रक्षा के लिए उग्र आंदोलन के लिए बाध्य होगी। उन्होंने स्पष्ट किया कि किसी भी अप्रिय स्थिति के लिए समस्त जिम्मेदारी विश्वविद्यालय प्रशासन की होगी। कुलपति प्रो दीवान सिंह रावत ने कहा छात्रों की समस्याओं को सुना जल्द समाधान का आश्वासन दिया गया है।











