‌बहुत याद आते हैं (रमेशदा )।परम श्रद्धेय गुरु जी।रमेश चंद्र जोशी । प्रदर्शन कला के मर्मज्ञ व बहु-आयामी व्यक्तित्व स्वर्गीय रमेश चंद्र जोशी कि २९वीं पुण्यतिथि पर पारम्परिक लोक संस्था परम्परा नैनीताल परिवार ने दी उन्हें श्रृद्धांजलि ।

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इस आलेख के मध्यम से गुरू जी के कृतित्व व व्यक्तित्व पर संक्षिप्त रूप में जानकारी सांझा कर रहा हूं।
आलेख – बृजमोहन जोशी।
संक्षिप्त परिचय -( गुरु जी)
नाम – रमेश चंद्र जोशी
पत्नी -कमला जोशी
पुत्र- स्व.श्री मोती राम जोशी पत्नी श्रीमती पार्वती जोशी.
रमेश चंद्र जोशी की एक सुपुत्री श्रीमती नीता पन्त, व दो सुपुत्र निखिल जोशी, तुषार जोशी हैं।
पण्डित मोती राम जोशी के घर में रमेश चंद्र जोशी का जन्म सेला खोला अल्मोड़ा में २५ जून १९४१ को हुआ। आपकी प्रारम्भिक शिक्षा नैनीताल में व अल्मोड़ा में हुई। संगीत प्रभाकर की डिग्री आपने प्रयाग संगीत समिति इलाहाबाद से उत्तीर्ण की। आप आकाशवाणी के B. High ग्रेड के कलाकार थे और वर्ष १९९० तक आकाशवाणी के विभिन्न केन्द्रों से आपके द्वारा गाए गए कुमाऊंनी लोक गीतों कि धूम रही। H M V (हिज मास्टर वाइस ग्रामोफोन कम्पनी) द्वारा आपके गाये लोक गीत पर रिकार्ड तैयार किया गया। उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा, राज्य ललित कला अकादमी उत्तर प्रदेश द्वारा आपको कुमाऊंनी लोक कला सर्वेक्षण कार्यक्रम में सर्वोच्च पद पर नियुक्त किया।‌ संगीत नाटक अकादमी उत्तर प्रदेश द्वारा कुमांऊनी लोक गीत एवं नृत्य की सफल प्रस्तुति के लिए आपको सम्मानित किया गया। आपने गीत एवं नाटक प्रभाग सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार के नैनीताल केन्द्र में , बिरला विद्या मन्दिर नैनीताल में, बालकनी बाड़ी अल्मोड़ा में, जन कला केन्द्र, चेतना प्रयास संस्था, लोक कलाकार संघ तथा विभिन्न संगठनों व संस्थाओं आदि के साथ कार्य किया। संगीत अध्यापक के रूप में – राजकिय इण्टर कालेज कनाली छीना, पिथौरागढ़, फल्द कोट अल्मोड़ा , ताड़ीखेत आदि में अपनी सेवाएं दी। आपने १९६० में अल्मोड़ा कचहरी में भी कार्य किया। आप नैनीताल में आल सेन्ट कालेज में भी संगीत कि शिक्षा देते थे।
आपने संगीत कि प्रारम्भिक शिक्षा अपने पिता मोती राम जोशी जी से प्राप्त कि । मोती राम जोशी जी एक बहुत ही कुशल मंजीरा वादक थे। संगीत कि विधिवत शिक्षा आपने मशहूर कुमांऊनी होली गायकी के संस्थापक – गायक व शिक्षाविद स्व.श्री तारा प्रसाद पाण्डे जी से प्राप्त की आपने उन्हे अपना गुरु माना।
आपने बृजेन्द्र लाल साह, वासुदेव त्रिपाठी, सुधा रानी शर्मा,सत्य नारंग सारंग, तारा दत्त सती,शेर सिंह बिष्ट, हरिकिशन साह, महेश नैपाली, प्रमोद साह,गिरीश तिवारी गिर्दा, चन्दन सिंह बोरा, गोपाल बाबू गोस्वामी, हरीश वर्मा, मुन्ना लाल साह, राम प्रसाद टोलिया, पृथ्वी राज साह, शंकर देव शर्मा,राजन लाल चौधरी, पुष्कर लाल, महेश चन्द्र जोशी, देवी लाल बर्मा,जसी राम, अनिल घिल्डियाल, जगमोहन बिष्ट, दिनेश डंडरियाल, श्रीमती मंजू, चन्द्रा,प्रेमा,सनेधा घोस, तारा चौधरी,प्रभा, पार्वती, आदि अनेक फनकारों के साथ उत्कृष्ट कार्य किया।
आप बहुमुखी प्रतिभा के धनी थे चाहे गायन हो, लोक गीत हो, शास्त्रीय संगीत हो, कुमांऊनी बैठकी होली हो ,अभिनय हो, नृत्य हो, वादन हो,आप तबला, हारमोनियम,हुड़ुका, गिटार, सितार, मंजीरा, बांसुरी के साथ साथ एक कुशल संगीत कम्पोज़र, गीतकार भी थे अर्थात प्रदर्शन कला के जितने भी आयाम होते हैं आप उन सभी में पारंगत थे। हाकी फुटबॉल के भी खिलाड़ी थे। आपने नैनीताल में एक सांस्कृतिक संस्था हिमानी आर्ट्स, के नाम से खोली, जो कि गीत एवं नाटक प्रभाग सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय भारत सरकार से मान्यता प्राप्त संस्था थी। जिसमें मैंने आपसे संगीत कि शिक्षा प्राप्त की। ये मेरा परम सौभाग्य है कि मुझे लगभग ३० बरसों तक गुरु जी का सानिध्य प्राप्त हुआ और आज मुझे गर्व है कि मैं रमेश चंद्र जोशी जी (गुरु जी) का शिष्य हूं।आज कला के क्षेत्र में मेरा जो भी परिचय है वह सब गुरु जी का ही आशीर्वाद है।
परम्परा परिवार , आयाम मंच, गीत एवं नाटक प्रभाग, तथा हम सभी रंगकर्मी, संस्कृति कर्मी, गुरु जी का परिवार,व लोक कलाकार उन्हें अपनी श्रृद्धांजलि अर्पित करते हैं। परम पूज्यनीय गुरु जी को शत-शत नमन।

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