भारतीय चेतना के संवाहक श्री राम” पर गोष्ठी संपन्न, श्रीराम ने सदैव मर्यादाओं का पालन किया -डॉ. राम चन्द्र (कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय)

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प्रकाशनार्थ समाचार

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नैनीताल l केन्द्रीय आर्य युवक परिषद् के तत्वावधान में “भारतीय चेतना के संवाहक श्रीराम” विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।य़ह कोरोना काल से 604 वां वेबिनार था।
वैदिक विद्वान डॉ.राम चन्द्र (विभागाध्यक्ष,संस्कृत विभाग कुरुक्षेत्र विश्वविद्यालय) ने कहा कि भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति एवं चेतना के सर्वोच्च प्रतीक हैं।उनका जीवन, पारिवारिक,सामाजिक,प्रशासनिक एवं वैश्विक जीवन मूल्यों के सभी पक्षों में भारतीय चेतना के संवाहक के रूप में प्रकट होता है। उन्होंने अपने चारों भाइयों के साथ महर्षि वसिष्ठ से गुरुकुल में शस्त्र और शास्त्र विद्या की पढाई की।राज्याभिषेक के महान अवसर के विपरीत पिता के आदेश से् धर्मचारिणी सीता एवं अनुज लक्ष्मण के साथ चौदह वर्ष के कठोर वनवास का वरण कर लिया।हिमालय जैसे संघर्षों के बीच भी सतत मर्यादा पालन ने उन्हें साधारण राजकुमार से कोटि-कोटि भारतीय के लिए आदर्श मर्यादा पुरुषोत्तम श्रीराम बना दिया।डॉ.रामचन्द्र ने कहा कि राम केवल इसलिए आदर्श नहीं है कि वह स्वयं महान थे बल्कि उनका व्यक्तित्व इसलिए महान है कि उनके साथ में रहने वाला हर व्यक्ति भी राम की चेतना से चेतनावान हो जाता है। भरत का अतुलनीय भ्रातृप्रेम जिसमें वे 14 वर्ष तक खड़ाऊ को सिंहासन पर रख करके शासन करते हैं।वनवास तो राम को मिला है पर लक्ष्मण उनके साथ एक आत्मा बनकर अनुगमन करते हैं।जनकनंदिनी सीता भी राम के संघर्षों में सहगामिनी बन जाती हैं। इतिहास के पृष्ठों में ऐसा उदाहरण दूसरा प्राप्त नहीं होता।
उन्होंने कहा कि राज्याभिषेक एवं वनवास के दो भिन्न-भिन्न अवसर पर भी राम के मुख मंडल पर समता का भाव था।बाली के पास रावण के वध की शक्ति थी पर राम ने यह कहते हुए उसका वध किया कि तुम वीर तो हो पर सदाचारी नहीं हो।रावण जैसे अतुलनीय शक्तिशाली पर उन्होंने सुग्रीव एवं हनुमान जैसे वनवासियों एवं अपने उच्चतम चरित्र से ही विजय प्राप्त कर ली।
डॉ रामचन्द्र ने आह्वान किया कि राम मंदिर का निर्माण हमारी पीढियों की शाश्वत अस्मिता की पूर्ति का विजय घोष है इसलिए इस अवसर पर घर-घर में दीपावली का दृश्य होना चाहिए , दीप सजाने चाहिएं और साथ-साथ में श्रीराम के चरित्र को जीवन में अपनाने का संकल्प भी बनना चाहिए।

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मुख्य अतिथि आर्य नेता राजेश मेहंदीरता व आनंद प्रकाश आर्य ने भी श्री राम के आदर्शों को जीवन में धारण करने का आह्वान किया उन्होंने कहा कि आर्य समाज भले ही मूर्ति पूजा नहीं मानता परंतु सदियों की प्रतीक्षा के बाद बन रहे मंदिर के निर्माण पर हार्दिक प्रसन्नता व्यक्त करता है यह आने वाली पीढ़ियों को प्रकाश पुंज बनकर मार्ग प्रशस्त करता रहेगा I
परिषद अध्यक्ष अनिल आर्य ने कुशल संचालन किया व राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया।

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गायिका प्रवीना ठक्कर, सुमित्रा गुप्ता, रविन्द्र गुप्ता, कौशल्या अरोड़ा, कमला हंस,जनक अरोड़ा,ऊषा सूद,चन्द्रकांता आर्य आदि के मधुर भजन हुए।

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