श्री मद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ तीसरे दिन भी जारी रहा

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नैनीताल। श्री मद्भागवत महापुराण ज्ञान यज्ञ के आज तीसरे गोवर्धन कीर्तन हाॅल मल्लीताल में व्यास भगवती प्रसाद जोशी जी द्वारा आर्यावर्त, भरतखण्ड, भारत भूमि के सन्दर्भ में जानकारी दी। उन्होंने कहा कि इस भारत भूमि को देवी देवता ऋषि-मुनि भी अपनी कर्म स्थली बनाते हैं। विश्व में और ऐसा कहीं नहीं है। हमारी नदियों का इतना महत्त्व है कि देवी देवता भी इनमें स्नान करने आते हैं ये नदियां हमारे पापों को अपने आप में ले लेती हैं।हम सब बड़े भाग्यशाली हैं कि हमें इन नदियों में स्नान करने का अवसर मिलता है। देवी देवता भी इस भारत भूमि का गुणगान करते हैं। देवता भी कहते हैं कि हमारा जन्म हो तो भारत भूमि में हो। अर्थात देवता भी भारत भूमि कि प्रसन्सा करते हुए इस भूमि में जन्म लेने कि प्रार्थना करते हैं।
व्यास जी भगवती प्रसाद जोशी ने जम्बूद्वीप का वर्णन किया। छः द्वीपों का वर्णन किया।मेरू पर्वत कि जानकारी दी।मेरू पर्वत जो जम्बूद्वीप से घिरा हुआ है, जिसके लाख योजन है। भारत एक खण्ड है। जिसमें सात जिह्वा वाले अग्नि देव निवास करते हैं।
व्यास जी ने एकादशी व्रत के माहात्म्य पर प्रकाश डाला। उन्होंने हमारी पांच कर्म इन्द्रियों कि जानकारी दी। उन्होंने कहा कि दस इन्द्रियों का अधिष्ठाता है मन। अनतः करण की शुद्धि के लिए नरक कि यातना न हो,इस ब्रत को करने वाले बैकुंठ को जाते हैं।
व्यास जी भगवती प्रसाद जोशी ने कहा कि वर्तमान में हमें अपने भाव कि अहमियत का ज्ञान नहीं है।आज हमारी आत्मा कलुषित हो गई है अनेक प्रकार से कुछ वायुमंडल के दोषों के कारण,कुछ खान पान, कुछ सत्संग के दोषों के कारण।यह जो श्री मद्भागवत महापुराण रूपी कथा है इसमें तीन भागवत पुरूष तथा तीन भागवत महिला है।जिन घरों में संवादों का विचार होता है उस घर में विवाद नहीं होता है।इसके विपरित होने पर विवाद होता है,टकरार होता है।
कथा के तीसरे दिन श्रृद्धालु भक्तो किअपार‌ भीड़ थी।

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