मृतक श्राद्ध कितना सही” विषय पर गोष्ठी संपन्न, जीवित माता पिता की सेवा ही सच्चा श्राद्ध-श्रुति सेतिया

नैनीताल l केन्द्रीय आर्य युवक परिषद् के तत्वावधान में “मृतक श्राद्ध कितना सही” विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।य़ह कोरोना काल से 674 वाँ वेबिनार था। वैदिक प्रवक्ता आचार्या श्रुति सेतिया ने कहा कि जीवित माता पिता की सेवा ही सच्चा श्राद्ध है।भोजन की आवश्यकता शरीर को होती है आत्मा को नहीं। उन्होंने कहा कि मूल अर्थों में श्राद्ध,श्रावणी उपाकर्म के पश्चात् अपने-अपने कार्यक्षेत्र में लौटते समय वरिष्ठों आदि के अभिनंदन सत्कार के लिए होता था।आज समाज में सबसे निर्बल व तिरस्कृत कोई हैं,तो वे हैं हमारे बुजुर्ग।वृद्धाश्रमों की बढ़ती कतारों वाला समाज श्राद्ध के नाम पर कर्मकाण्ड कर अपने कर्तव्य की इतिश्री समझ ले तो यह भीषण विडम्बना ही है।यदि हम घर परिवारों में उन्हें उचित आदर-सत्कार,मान-सम्मान व स्नेह के दो बोल भी नहीं दे सकते तो श्राद्ध के नाम पर किया गया हमारा सब कुछ केवल तमाशा व ढोंग है।यों भी वह अतार्किक व श्राद्ध का गलत अभिप्राय लगा कर किया जाने वाला कार्य तो है ही। जब तक इसका सही अर्थ समझ कर इसे सही ढंग से नहीं किया जाएगा तब तक यह करने वाले को कोई फल नहीं दे सकता (यदि आप किसी फल की आशा में इसे करते हैं तो)।वैसे प्रत्येक कर्म अपना फल तो देता ही है और उसे अच्छा किया जाए तो अच्छा फल भी मिलता ही है।
मृतकों तक कोई सन्देश या किसी का खाया भोजन नहीं पहुँचता और न ही आपके-हमारे दिवंगत पूर्वज मात्र खाने-पीने से संतुष्ट और सुखी हो जाने वाले हैं।भूख देह को लगती है,आत्मा को यह आहार नहीं चाहिए। मृतक पूर्वजों को भोजन पहुँचाने ( जिसकी उन्हें आवश्यकता ही नहीं) से अधिक बढ़कर आवश्यक है कि भूखों को भोजन मिले,अपने जीवित माता पिता व बुजुर्गों को आदर सम्मान से हमारे घरों में स्थान,प्रतिष्ठा व अपनापन मिले,उन्हें कभी कोई दुख सन्ताप हमारे कारण न हो।उनके आशीर्वादों के हम सदा भागी बनें और उनकी सेवा में सुख पाएँ।किसी दिन वृद्धाश्रम में जाकर उन सबको आदर सत्कार पूर्वक अपने हाथ से भोजन करवा उनके साथ समय बिताकर देखिए… कितने आशीष मिलेंगे। परिवार के वरिष्ठों व अपने माता-पिता आदि की सेवा सम्मान में जरा-सा जुट कर देखिए,कैसे घर पर सुख सौभाग्य बरसता है। मुख्य अतिथि आर्य नेत्री शशि कांता कस्तूरिया व अध्यक्ष पूजा सलूजा,अनिता रेलन ,सुधीर बंसल,विमल चड्डा (नैरोबी)
ने अपने विचार रखे।कार्यक्रम का कुशल संचालन परिषद अध्यक्ष अनिल आर्य ने किया व प्रदेश अध्यक्ष प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया। गायिका कौशल्या अरोड़ा, जनक अरोड़ा, रचना वर्मा, ललिता धवन,आशा आर्य, सुनीता आहूजा, कृष्णा पाहुजा, रविन्द्र गुप्ता आदि ने भजन सुनाए।

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