गौरवपूर्ण क्षण : फार वेस्टर्न विश्वविद्यालय, नेपाल के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए कुविवि के कुलपति प्रो० दीवान एस रावत

Advertisement

कुलपति प्रो० रावत ने अपने सम्बोधन में भारत एवं नेपाल के बहुस्तरीय और बहुआयामी संबंधों को बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया

महेन्द्रनगर । फॉर वेस्टर्न यूनिवर्सिटी, नेपाल के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति कुलपति प्रो० दीवान एस रावत बतौर मुख्य अतिथि शामिल हुए। दीक्षांत समारोह की अध्यक्षता नेपाल के प्रधानमंत्री श्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ द्वारा एवं सह-अध्यक्षता शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री सुमना श्रेष्ठ द्वारा की गई।

फार वेस्टर्न विश्वविद्यालय, नेपाल के दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० दीवान एस रावत ने अपने सम्बोधन में उपाधि प्राप्त करने वाले मेधावी छात्रों को शुभकामनाएं देते हुए कहा कि वैश्विक परिदृश्य बड़ी तेजी से बदल रहा है ऐसे में विद्यार्थियों को परंपरागत पद्धतियों के साथ-साथ रोजगार और कौशल के लिए नए क्षेत्रों की तलाश करनी होगी। उन्होंने कहा कि किसी भी विषय में हम शोध करें तो उसका लक्ष्य यह होना चाहिए कि वह शोध मानव-कल्याण के लिए उपयोगी हो। साथ ही यह विश्वविद्यालय ज्ञान का ऐसा आलोक केन्द्र बनें जिनसे निकलकर विद्यार्थी समाज और राष्ट्र के कल्याण के लिए कार्य करें।

यह भी पढ़ें 👉  पहली बार टनकपुर से चले आदि कैलाश यात्रा के पहुंचने पर कुमाऊं मंडल विकास निगम के प्रबंधक दिनेश गुरुरानी के नेतृत्व में पर्यटक आवास गृह के कर्मचारियों ने जूस पिलाकर व माला पहनाकर यात्रियों का भव्य स्वागत किया ।

अपने सम्बोधन में कुलपति प्रो० रावत ने भारत एवं नेपाल के बहुस्तरीय और बहुआयामी संबंधों को भी बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया। उन्होंने कहा कि भगवान बुद्ध एवं मां सीता की जन्मस्थली नेपाल से भारत का रोटी और बेटी का रिश्ता है। दोनों देश के लोग सामाजिक, प्राकृतिक, भौगोलिक व आध्यात्मिक रूप से एक दूसरे से भावनात्मक रूप से जुड़े हैं। सुख-दुख के साथी हैं। दोनों देश की परंपरा, रहन-सहन, जीवन शैली के साथ-साथ धार्मिक, सांस्कृतिक, व्यावसायिक सम्बन्ध भी काफी मजबूत हैं। अयोध्या में राम मंदिर बनने से जितनी खुशी भारतीयों को हो रही है उससे कहीं अधिक हर्ष नेपाल के सनातनियों में है। उन्होंने कहा कि भारत-नेपाल प्राचीन काल से दो शरीर हैं, लेकिन सांस्कृतिक व आध्यात्मिक विरासत एक दूसरे को एकात्म में जोड़ती है। आध्यात्मिक आधार पर भारत नेपाल जम्मूदीप के ही खंड रहे हैं और आज भी नेपाल में सनातनी हिंदू कर्मकांड और पूजापाठ में संकल्प लेते समय जम्मू दीपे भारत खंडे को उच्चारित करते हैं। यही हमारी पूंजी है।

यह भी पढ़ें 👉  दिल्ली एनसीआर की हाई स्कूल छात्रा आसवी नेगी ने वित्तीय साक्षरता पर 180 से अधिक छात्राओं और उनके माता-पिता के लिए एक कार्यशाला आयोजित की।

फॉर वेस्टर्न यूनिवर्सिटी, नेपाल के चतुर्थ दीक्षांत समारोह में अध्यक्षता कर रहे नेपाल के प्रधानमंत्री एवं कुलाधिपति श्री पुष्प कमल दहल ‘प्रचंड’ एवम शिक्षा, विज्ञान और प्रौद्योगिकी मंत्री सुमना श्रेष्ठ ने कुमाऊं विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो० दीवान एस रावत को स्मृति चिह्न प्रदान कर सम्मानित किया।

Advertisement