टिशू कल्चर से उच्च गुणवत्ता के साथ पौधों को कर रहे विकसितकीवी, तिमूर व अन्य औषधीय पौधे किए जा रहे तैयार

नैनीताल। पटवाडांगर जैव प्रौद्योगिकी परिषद में टिशू कल्चर से उच्च गुणवत्ता के साथ पौधों को विकसित करने का कार्य किया जा रहा है। निदेशक संजय कुमार के निर्देशन में टिशू कल्चर के माध्यम से कीवी, तिमूर व अन्य औषधीय पौधों को तैयार किए गए हैं।
बता दें कि टिशू कल्चर (ऊतक संवर्धन) एक आधुनिक तकनीक है। जिसमें किसी भी पौधे के छोटे से हिस्से पत्ती या तने को प्रयोगशाला में नियंत्रित वातावरण में पौधे तैयार किए जाते हैं। जो पोषक तत्वों से भरपूर, स्वस्थ, रोग-मुक्त और समान गुणों वाले होते हैं। जिससे तेजी से क्लोन बनाए जा सकते हैं। यही नहीं इस विधि से दुर्लभ प्रजातियों का संरक्षण भी किया जा रहा है।पटवाडांगर संस्थान के प्रभारी डा. सुमित पुरोहित ने बताया कि यह तकनीक फसल सुधार, रोग-मुक्त बीज उत्पादन और आनुवंशिक रूप से बेहतर पौधे बनाने के लिए बहुत उपयोगी है। इस पर मौसम का कम असर पड़ता है। बताया कि पटवाडांगर संस्थान में हाईटेक प्लांट टिशू कल्चर प्रयोगशाला में कीवी, तिमूर,कूट, बड़ी इलायची, ब्राह्मी व केले के पौधों को तैयार किया जा रहा है। बताया कि टिशू कल्चर से एक पौध को तैयार होने में छह से आठ महिने लगते हैं। पौध तैयार होने के बाद पौधों को मिट्टी में लगाया जा सकता है। बताया कि टिशू कल्चर से तैयार पौधे पहाड़ों व मैदान के किसानों के लिए बहुत लाभदायक होंगे। इससे कई विलुप्त होती जा रही पौंधों की प्रजातियाें को भी संरक्षित किया जा सकेगा।

यह भी पढ़ें 👉  खेल जगत के दिग्गज #घनश्यामलाल साहजी के आकस्मिक निधन पर पूर्व विधायक डॉ नारायण सिंह जंतवाल ने जताया गहरा शोक

इनसेट-

टिशू कल्चर से तैयार पौध किसानों अपने बागानों में लगा सकेंगे
नैनीताल। डॉ सुमित पुरोहित ने बताया कि टिशू कल्चर से तैयार पौध उचित मूल्य तय कर किसानों को दिए जाएंगे। साथ ही किसानों को पौध लगाने व उसके रख रखाव का प्रशिक्षण दिया जाएगा। जिससे किसान पौध लगाकर फल उत्पादन कर अपनी आजीविका बढ़ा सकते हैं। इससे किसानों की आर्थिकी में सुधार होगा।

यह भी पढ़ें 👉  इथिकल राइटिंग स्किल विषय पर कार्याशाला संपन्न

Advertisement
Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad Ad