कुमाऊँ विश्वविद्यालय में शोधार्थियों से खुला संवाद: समस्याएँ, सुझाव और समाधान पर हुई सार्थक चर्चा

नैनीताल। कुमाऊँ विश्वविद्यालय, नैनीताल में कुलपति प्रो. दीवान सिंह रावत द्वारा विश्वविद्यालय के दोनों परिसरों के पीएचडी शोधार्थियों एवं रिसर्च एसोसिएट्स के साथ एक ओपन हाउस संवाद आयोजित किया गया। यह संवाद पूर्णतः शोधार्थी-केंद्रित रहा, जिसमें आंतरिक संकाय सदस्यों की उपस्थिति नहीं रखी गई, ताकि शोधार्थी बिना किसी संकोच के अपनी समस्याएँ और सुझाव प्रस्तुत कर सकें।
इस अवसर पर बड़ी संख्या में पीएचडी शोधार्थियों एवं रिसर्च एसोसिएट्स ने सहभागिता की और विश्वविद्यालय में शोध से जुड़ी शैक्षणिक, प्रशासनिक तथा आधारभूत सुविधाओं से संबंधित विभिन्न मुद्दों पर अपने अनुभव साझा किए। संवाद के दौरान शोधार्थियों ने विशेष रूप से पेयजल की नियमित उपलब्धता, विद्युत आपूर्ति में व्यवधान, वाई-फाई कनेक्टिविटी की समस्याएँ, शोध से संबंधित सॉफ्टवेयर प्रशिक्षण की आवश्यकता तथा फैलोशिप से जुड़े विलंब और प्रक्रियागत कठिनाइयों को प्रमुखता से उठाया।
इस अवसर पर कुलपति प्रो. रावत ने शोधार्थियों को प्रोत्साहित करते हुए कहा कि गुणवत्तापूर्ण शोध के लिए विश्वविद्यालय की कार्य-संस्कृति में निरंतर सुधार आवश्यक है। उन्होंने शोध की गुणवत्ता और अधिकतम अकादमिक उत्पादकता सुनिश्चित करने हेतु छात्रों को देर शाम तक निरंतर कार्य करने के लिए प्रेरित किया तथा शोध प्रकाशनों के संदर्भ में स्कोपस-सूचीबद्ध जर्नल्स में प्रकाशन को प्राथमिकता देने का आह्वान किया, न कि केवल सामान्य पीयर-रिव्यूड पत्रिकाओं तक सीमित रहने की प्रवृत्ति अपनाई जाए।
शोधार्थियों से प्राप्त फीडबैक को गंभीरता से सुनते हुए कुलपति ने सभी बिंदुओं पर सकारात्मक एवं संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाया। उन्होंने आश्वस्त किया कि विश्वविद्यालय प्रशासन शोध-अनुकूल वातावरण के निर्माण के लिए पूर्णतः प्रतिबद्ध है तथा संवाद में सामने आई समस्याओं के समाधान हेतु ठोस एवं व्यावहारिक कदम उठाए जाएंगे।
कुलपति प्रो रावत ने शोधार्थियों को उच्चस्तरीय शोध, अकादमिक अनुशासन और नैतिक शोध-आचरण के प्रति प्रेरित करते हुए कहा कि विश्वविद्यालय का भविष्य उसके शोधार्थियों की गुणवत्ता, प्रतिबद्धता और नवाचार क्षमता पर निर्भर करता है।
संवाद के दौरान शोधार्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन द्वारा विगत दो वर्षों में उठाए गए कदमों की सराहना की। उन्होंने आंतरिक शोध अनुदान तथा राष्ट्रीय एवं अंतरराष्ट्रीय सम्मेलनों में सहभागिता हेतु प्रदान की गई वित्तीय सहायता को अत्यंत उपयोगी बताते हुए कहा कि इन पहलों से उनके शोध कार्य की गुणवत्ता और दृश्यता में उल्लेखनीय सुधार हुआ है। साथ ही शोधार्थियों ने विश्वविद्यालय के शोध परिवेश को और अधिक सुदृढ़ बनाने के उद्देश्य से कई रचनात्मक सुझाव भी प्रस्तुत किए।

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