चौथी पुण्यतिथि पर बहु आयामी व्यक्तित्व के धनी विश्वंभर नाथ साह ‘सखा ‘ दाज्यू को पारम्परिक लोक संस्था परम्परा ने किया याद। बृजमोहन जोशी
नैनीताल। बहु आयामी व्यक्तित्व के धनी
प्रसिद्ध रंगकर्मी, मूर्तिकार, चित्रकार, शास्त्रीय संगीत और लोक संस्कृति के विविध आयामों के ज्ञाता विश्वंभर नाथ साह ‘सखा’ दाज्यू को उनकी चौथी पुण्यतिथि पर पारम्परिक लोक संस्था परम्परा नैनीताल द्वारा दी गयी श्रृद्धांजलि।श्रृद्धांजलि अर्पित करते हुए वरिष्ठ संस्कृति कर्मी पारम्परिक लोक संस्था परम्परा नैनीताल के निदेशक बृजमोहन जोशी ने “सखा” दाज्यू के व्यक्तित्व व कृतित्व पर प्रकाश डालते हुए कहा कि सखा दाज्यू का जन्म अल्मोड़ा में हुआ और उनका लालन-पालन,शिक्षा आदि उनके नाना-नानी के घर नैनीताल कैला खान में हुई। पठन-पाठन के बाद कुछ समय के लिए सखा दाज्यू ने नैनीताल में एक निजी स्कूल में अंग्रेजी शिक्षक के रूप में अपनी सेवाऐं दी और कुछ समय बाद आपने वह नौकरी छोड़ दी। आप कुछ समय नैनीताल छावनी परिषद के सभासद रहे। श्री मां नयना देवी मन्दिर नैनीताल अमर उदय ट्रस्ट के न्यासी भी थे।
आपकी नैनीताल में होने वाले सांस्कृतिक सामाजिक,
धार्मिक, और राजनीतिक कार्यक्रमों मे सक्रिय भागीदारी हमेशा बनी रहती थी। आप वर्षों तक कम्युनिस्ट पार्टी के सक्रिय सदस्यों में शामिल रहे। कुमाऊंनी बैठकी (नागर होली) होली के आप मर्मज्ञ थे। मंजे हुए होल्यार थे।
वर्ष १९९६ से पारम्परिक लोक संस्था परम्परा नैनीताल द्वारा आयोजित भारतीय नव वर्ष मिलन समारोह में गिरीश तिवारी ‘गिर्दा’, पद्मश्री डॉ.यशोधर मठपाल, पद्मश्री डॉ.शेखर पाठक, (से.नि.) पुलिस महानिदेशक विजय राघव पन्त, के.के.साह, आचार्य कैलाश चंद्र सुयाल के साथ साथ सखा दाज्यू का भी विशेष मार्गदर्शन व सहयोग परम्परा को प्राप्त होता रहा और आप सभी के व्यक्तिगत मार्गदर्शन रुपी आशीर्वाद से परम्परा संस्था पिछले ३० वर्षों से भारतीय नव वर्ष मिलन समारोह का आयोजन करती आ रही है।
श्री मां नयना देवी मंदिर मल्लीताल नैनीताल अमर उदय ट्रस्ट का सलाहकार सदस्य होने के नाते मुझे आपके सानिध्य में बहुत कुछ सिखने का शुभ अवसर प्राप्त हुआ,आप मेरे ससुर हरीश चंद्र बुधानी के बाल सखा भी हैं और उनसे भी आपके व्यक्तित्व और कृतित्व पर जानकारी प्राप्त होती रहती है। अक्सर आपके आवास कैला खान में गिर्दा के साथ साथ मैंने परम्परा संस्था नैनीताल के बहाने अपने गुरु जी गीत एवं नाटक प्रभाग के वरिष्ठ प्रशिक्षक व प्रदर्शन कला के मर्मज्ञ रमेश चन्द्र जोशी,भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोक संगीत, रंगमंचीय विधाओं के सन्दर्भ मे बहु आयामी व्यक्तित्व सत्य नारायण सारंग, कुमाउनी लोक कलाओं के शोध पुरोधा पण्डित नाथूराम उप्रेती, गढ़वाल चित्रकला शैली के अद्भुत चित्रकार, साहित्यकार तथा ज्योतिषाचार्य मौला राम ‘तूंवर’तोमर के कृतित्व व व्यक्तित्व पर तथा लोक संस्कृति के विविध आयामों पर अक्सर खूब चर्चा होती रहती थी, इन चर्चाओं में अक्सर गिरीशचंद्र तिवारी ‘गिर्दा’,सखा दाज्यू के भाई जगदीश लाल साह भी हुआ करतें थे। राजीव लोचन साह जी तो हमेशा मुझसे कहते ही रहते थे कि सखा दाज्यू से जितनी जानकारी ले सकते हो ले लो। उपरोक्त आप सभी महानुभावों के मार्गदर्शन में पारम्परिक लोक संस्था परम्परा द्वारा वर्ष २००४ से एक लिखित दस्तावेज के रूप में परम्परा नामक १२ वार्षिक विशेषांकों का संकलन व प्रकाशन परम्परा करने में सफल रही जिसमें आप सभी के साथ साथ गुरु जी के.पी.साह, डॉ.भुवन चन्द शर्मा, डॉ.अनिल कार्की का महत्वपूर्ण सहयोग परम्परा को प्राप्त हुआ।
के.के.साह जी के आवास पर होने वाली होली कि बैठकों में “अक्सर सखा दाज्यू” की गायकी का आनन्द हम लिया करते थे। कौन भुला सकता है, उनकी उस गायकी को और इसके कायल तो अरविंद आश्रम नैनीताल के नलिन जी भी है वो भी होली गायन सुनने के.के.
साह जी के आवास पर अवश्य आते थे।
आज जब पिछे मुड़कर देखता हूं तो उन अनमोल यादों के सिवा और कुछ भी शेष नहीं है।
मुझे आज भी याद है श्री मां नयना देवी जन्म शताब्दी समारोह हेतु एक आरती की धुन सखा दाज्यू बना रहे थे जो राग दुर्गा पर आधारित थी, मुझे कई दिनों तक सखा दाज्यू ने अपने आवास में बुलाया एक दिन एक बांसुरी वादक को लेकर आने को कहा तो मैं नैनीताल शंकर स्टोर से गोपाल जोशी जी को अपने साथ ले गया तो बातों बातों में जब गोपाल जोशी से परिचय हुआ तो पता चला की शंकर स्टोर में जो मां दुर्गा देवी की मूर्ति है एक समय उसकी चित्रकारी भी सखा दाज्यू ने की थी,गोपाल जोशी के पिता जी से उनके बड़े मधुर सम्बन्ध थे। उस दिन बांसुरी के साथ नन्दा स्तुति का आपने बहुत देर तक अभ्यास किया और बीच-बीच में हमारी राय भी आप बराबर पूछते रहते थे,ये भाव ये बड़प्पन सखा दाज्यू और गिर्दा मे ही मैंने देखा,यह बात बहुत कम कलाकारों में मैंने देखी।
….समय बड़ा बलवान होता है, देखते देखते चार वर्ष का समय बीत गया। और आज हम सभी बड़े भारी मन से सखा दाज्यू को उनकी चौथी पुण्यतिथि पर श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
इस अवसर पर पारम्परिक लोक संस्था परम्परा नैनीताल की संरक्षक कमला जोशी, सचिव मनोज जोशी, अध्यक्ष अनुभा जोशी, प्रशान्त कपिल, मीनू कपिल, निशांत कपिल, साबी कपिल, गीता कपिल, श्रीपर्णा जोशी आदि उपस्थित थे।
नैनीताल शहर के समस्त रंगकर्मी, संस्कृति कर्मी,
साहित्यकार तथा आम जन भी सखा दाज्यू की चौथी पुण्यतिथि पर अपनी विनम्र श्रद्धांजलि अर्पित करते हैं।
आपको शत् शत् नमन।








