127 वें बलिदान दिवस पर प.लेखराम को दी श्रद्धांजलि, धर्मान्तरण को रोकना ही पं लेखराम को श्रद्धांजलि राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य, शुद्धि आन्दोलन की भेंट चढ़ गए पंडित लेखराम – महेन्द्र भाई

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नैनीताल l केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में अमर शहीद,रक्त साक्षी प. लेखराम आर्य मुसाफिर के 127 वें बलिदान दिवस पर
ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया।उल्लेखनीय है कि एक धर्मान्ध मुसलमान द्वारा शुद्धि अभियान से रूष्ट होकर 6 मार्च 1897 को लाहौर में छुरा मारकर उनकी हत्या कर दी गई थी।

केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष अनिल आर्य ने कहा कि सत्यनिष्ठ, धर्मवीर,आत्म बलिदानी पं लेखराम अडिग ईश्वर विश्वासी, महान मनीषी, स्पष्ट निर्भीक वक्ता,आदर्श धर्म प्रचारक,त्यागी तपस्वी गवेषक,अच्छे लेखक थे। धर्मान्तरण रोकने और धर्मान्तरित लोगों की घर वापसी व शुद्धि करण के लिए ही पण्डित लेखराम ने अपना जीवन आहूत कर दिया और उनकी हत्या कर दी गई।पं.लेखराम ने महर्षि देव दयानन्द जी का जीवन चरित्र लिखने के लिए पूरे देश में घूम घूम कर प्रमाण एकत्रित किए।आज जब देश में दलित हिन्दु वर्ग का धर्मान्तरण ईसाई मिशनरियों द्वारा पूरे जोरों से किया जा रहा है तो हमारी पं लेखराम को सच्ची श्रद्धांजलि यही होगी कि आज देश में धर्मान्तरण को रोकने के लिए सबको पूर्ण प्रयास करना होगा। उन्होंने हिन्दू धर्म की रक्षा के लिए अपना बलिदान दे दिया I

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आचार्य महेन्द्र भाई ने कहा कि हिन्दु धर्म की रक्षा के लिए अनेको लोगों ने बलिदान दिये,उनमें पं.लेखराम का नाम गर्व से लिया जाता है।उन्होंने हिन्दुओं को मुसलमान बनाने के कार्य को रोका व किसी कारण धर्म परिवर्तन कर चुके हिन्दुओं के लिए यज्ञ द्वारा शुद्ध करके घर वापसी का मार्ग प्रशस्त किया।उनका पूरा जीवन वेद प्रचार व शुद्धि आंदोलन के लिए समर्पित रहा।आज उनके बलिदान से प्रेरणा लेकर हिन्दु समाज को संगठित करने की आवश्यकता है तभी आने वाली बाधाओं से मुकाबला कर सकते हैं।

आर्य युवक परिषद उत्तर प्रदेश के प्रान्तीय महामंत्री प्रवीण आर्य ने भी शुद्धि आंदोलन को राष्ट्र हित में प्रभावी बताया। उन्होंने कहा कि नई पीढ़ी को हिन्दू धर्म के योद्धाओं के इतिहास को बतलाने की आवश्यकता है और घर वापसी के अभियान चलाने की आवश्यकता है।
पूर्व मेट्रो पोलटन मैजिस्ट्रेट ओम सपरा ने कहा कि पं. लेखराम ने महर्षि दयानन्द की वैदिक मान्यताओं, सिद्धान्तों व उद्देश्यों के प्रचार को ही अपने जीवन का उद्देश्य बनाया था और अपनी योग्यता व पुरुषार्थ से वैदिक धर्म की महत्वपूर्ण सेवा व रक्षा की,उन्होंने अपने आगे पीछे कपड़े पर आर्य समाज के नियम लिखकर टांग रखे थे।सम्पूर्ण आर्य जगत् व सभी वैदिक धर्मी उनकी सेवाओं एवं बलिदान के लिए सदा-सदा के लिए ऋणी व कृतज्ञ हैं।उनके बलिदान ने यह सिद्ध कर दिया कि वैदिक धर्म के विरोधियों के पास वेद और आर्यसमाज के सिद्धान्तों की काट व उनका उत्तर नहीं है।आज फिर से प.लेखराम जैसे वीरो की आवश्यकता है जो शास्त्रार्थ से वेद विरुद्ध बातों का युक्ति युक्त उत्तर दे सकें और विधर्मी हुए लोगों को शुद्ध करके वापिस हिन्दू धर्म में दीक्षा दे सकें।

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समारोह अध्यक्ष कृष्ण कुमार यादव ने कहा कि धर्मवीर पण्डित लेखराम ने अपनी नश्वर देह का त्याग करते हुए आर्यो को यह सन्देश दिया था, ‘‘तकरीर व तहरीर से प्रचार का कार्य बन्द न हो।” आज आर्यों को उनकी इस वसीयत को पूरा करना है,तभी भविष्य में वेदाज्ञा ‘कृण्वन्तो विश्वमार्यम्’ चरितार्थ हो सकता है।
प्रवीण आर्य पिंकी, अनिता रेलन, कृष्णा पाहुजा, राजेश मेहन्दीरता,सुदेश आर्य आदि के मधुर भजन हुए।

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