भास्कर आप्टिकल क्लिनिक तल्लीताल नैनीताल परिवार की ओर से आप सभी को (कालयुक्त नामक सम्वत्सर )भारतीय चैत्र प्रतिपदा सम्वत २०८१ सन २०२४ -२५ के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं।

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नैनीताल l भास्कर आप्टिकल क्लिनिक तल्लीताल नैनीताल परिवार की ओर से आप सभी को (कालयुक्त नामक सम्वत्सर )भारतीय चैत्र प्रतिपदा सम्वत २०८१ सन २०२४ -२५ के पावन पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं। भास्कर आप्टिकल क्लिनिक के स्वामी भास्कर त्रिवेदी के द्वारा नैनीताल में वर्ष १९९५ में उसके बाद उनके ज्येष्ठ पुत्र डॉ.सुशील त्रिवेदी ‌ने उनके बाद उनके कनिष्ट पुत्र महान त्रिवेदी व उनके परिवार व सहयोगियों के द्वारा एक (संक्षिप्त पंचांग ) व्रतोंत्तसव पर्व तिथि दर्शिका वार्षिक पत्रिका का निर्माण व प्रकाशन कार्य लगातार भारतीय नववर्ष पर किया जा रहा है। सामान्यतः विशेष रूप से सामान्य घरों में गृहिणियों में इस पत्रिका की भी आज बड़ी मांग है।भास्कर क्लिनिक द्वारा यह वार्षिक पत्रिका निःशुल्क भेंट कि जाती है। सामान्य गृहिणियों में तो इस वार्षिक पत्रिका की प्रतिक्षा ऐसे रहती है जैसे हमारी बहनों को इस माह अपने अपने मायके पक्ष द्वारा प्राप्त होने वाली भेंट- भिटोली की । ठीक उसी तरह इस पत्रिका की भी उन्हें प्रतिक्षा रहती है। एक विशेष बात यह है कि -इस वर्ष भास्कर जी द्वारा इस पत्रिका के माध्यम से एक विचारणीय प्रश्न के माध्यम से सभी महानुभावों से करबद्ध निवेदन भी किया गया है कि कृपा कर हम अपने अपने पूजा गृहों के निष्प्रयोज्य पूजन सामग्री के निस्तारण (सिवाने) के विषय में और उसके निस्तारण के सम्बन्ध में एक तरीका भी सुझाया गया है कि क्या हम लोग जो अपनी पूजन सामग्री – भगवानों के चित्रों, मूर्तीयों, को कहीं भी इधर -उधर निस्तारित कर देते हैं कहीं अज्ञानतावश हम कोई पाप तो नहीं कर रहे हैं? इस तरह के पाप से बचने के लिए हम सब क्या कर सकते हैं – हम सब के द्वारा तीर्थों से लाए प्रसाद रूप में मूर्ति, चित्र, निमंत्रण पत्रों पर देवताओं के चित्र प्रतीकों, पूजा अर्चना कि पुस्तकों , देवताओं के कलैंडर,भगवान के चित्रों आदि निष्प्रयोज्य सामग्री को हम अग्नि को समर्पित कर सकते है जैसे यज्ञ -हवन में आहूति देकर (स्वाहा ) के साथ हम करते हैं। भूमि पर गढ्ढा बनाकर भी हम ऐसी सामग्री को धरती मां को समर्पित कर‌ सकते है। इस समस्या के हल के लिए हम सभी को हमारे धार्मिक- संगठनों, विद्यार्थियों को आगे आना नितान्त आवश्यकीय है।

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