नैनीताल। दिनांक ३१ अगस्त २०२५संस्कृति अंक। आलेख बृजमोहन जोशी।”गंवरा मैसर अनुष्ठान “

नैनीताल रूसी गांव में पिछले लगभग ७० वर्षों से श्रीमती देवकी देवी पत्नी स्वर्गीय श्री लछम सिंह बिष्ट के आवास पर आरम्भ हुआ अब इस आयोजन को उसी प्रकार उनके सुपुत्र श्री नन्दन सिंह बिष्ट तथा बहू श्रीमती गीता बिष्ट अपनी सास देवकी देवी के साथ स्थानीय महिलाओं के सहयोग से लगातार करती आ रहीं है। लोक संस्कृति में गंवरा मैसर अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है। आज इस अनुष्ठान के चौथे दिन दूर्वाष्टमी को स्थानीय महिलाओं के द्वारा बिरूड़ भाट की कथा के शेष भाग का गायन सामुहिक रूप से किया गया। स्थानीय महिलाओं के द्वारा बड़े ही भक्ति पूर्वक बारी बारी से नृत्य गीत के माध्यम से बाला गणपति को इस नृत्य लोक गीत के साथ झुलाया गया – गीत के बोल थे हुलेरी बाला हुलेरी….
इसके बाद ननद और भाभी के खेलों का आयोजन किया गया।
इसके उपरांत फल फटकने का खेल खेला गया, फल फटकने में जिसके आंचल में फल आता है उसे शुभ शकुन माना जाता है। तदुपरान्त महिलाओं के द्वारा घर के आंगन में गंवरा के जन्म से लेकर ससुराल जाने तक के लोक नृत्य गीतों ( झोड़ा) का गायन किया गया।
तू देवी भल करिये…..
* हिट गंवरा बागेश्वरा….
ओ दीदी गंवरा हो तुम के झुमो…. मेरी बैणा गंवरा हो तुम के झुमो…..
फूला हाजरी का फूला त्वै देवी फूल चढुलों…..
नाची बौ खेली सौ लौली गंवरा देवी धौ तेरो कस नाचा…… आदि लोक नृत्य गीतों का गायन किया गया।यह व्रत मुख्य रूप से संतान
की प्राप्ति व अटल सुहाग की कामना के उददेश्य से किया जाता है।
आज के इस अनुष्ठान में श्रीमती गीता बिष्ट, तनुजा बिष्ट,ममता बिष्ट,दीपा बिष्ट, चन्द्रा खनी,तारा मेहरा, विमला मेहरा, कांता मेहरा,प्रेमा बिष्ट,राधा बिष्ट,निधि बिष्ट, गंगा बिष्ट,कमला बिष्ट,दीपा बिष्ट,धना बिष्ट, नारायणी, दीपिका,पूनम, विद्या गैला कोटी, लता जोशी, गंगा मेहरा,प्रेमा बिष्ट, चेतना बिष्ट ने सहभागिता की। इस अनुष्ठान को सफल बनाने में नन्दन सिंह बिष्ट, गोविन्द सिंह बिष्ट, गोपाल सिंह बिष्ट द्वारा विशेष सहयोग दिया गया।


