द्वापर युग में भगवान श्रीकृष्ण ने की गौड़ भैरव की स्थापना तथा कलियुग में गोल्ज्यू के रूप में भी लिया जन्म

नैनीताल l श्रीमद् देवी भागवत कथा ज्ञान गंगा के पंचम दिवस आचार्य उप व्यास कैलाश चंद्र पांडे,आचार्य कैलाश चंद्र जोशी, आचार्य नीरज पलड़िया,मोहन चन्द कपिल,दीपेश कपिल तथा यजमान श्रीमती ऊषा तिवारी गिरीश तिवारी,श्रीमती गीता मेहरा अजय सिंह मेहरा द्वारा भगवती विग्रह पूजन,गणेश पूजन,पंचांग पूर्वांगादि पूजन, तथा मन्दिर परिसर में समस्त देवी-देवताओं का पूजन अर्चन किया गया।
आज की कथा से पूर्व संगीत गायकों आचार्य उमा शंकर कपिल,नीरज सती, आचार्य पंकज जोशी के द्वारा देवी भजन,गोल्ज्यू के सुन्दर भजन, तथा अनेक भजनों का गायन किया गया, जिसमें उपस्थित मातृशक्ति द्वारा भी उन भजनों को कर तल ध्वनि के साथ दोहराया गया।
व्यास कैलाश चंद्र सुयाल जी द्वारा आज की कथा का शुभारंभ भगवान शिव के विवाह के बाद उनके पुत्र प्रद्युम्न के जीवन की लीलाओं से आगे की अनेक कथाओं के साथ किया गया।
व्यास जी ने बताया कि द्वापर युग में किस तरह भगवान श्रीकृष्ण के द्वारा गौड़ भैरव की उत्पत्ति उनकी स्थापना की तथा वर्तमान में किस प्रकार गौड़ भैरव के अवतारी (गोल्ज्यू) के रूप में किस तरह एक न्याय कारी के साथ साथ, अपने नाम के साथ उसे जोड़कर कृष्ण अवतारी के रूप में जन्म लिया। इस कथा व्यास जी द्वारा स्थानीय कुमाऊनी भाषा में व कथा के अंशों को जागर धुनों के साथ बहुत ही सुन्दर तरीके से उपस्थित श्रृद्धालुओं के सम्मुख रखा गया।
आज इस श्रीमद् देवी भागवत कथा में श्री नानतिन महाराज‌ जी के शिष्य श्री शंकर महाराज जी ने भी देवी मंदिर भवाली में पधारकर तथा इस कथा में सम्मिलित होकर इस कथा का आनन्द लिया ,उपस्थित सभी श्रृद्धालुओं को अपना आशीर्वाद भी प्रदान किया।
व्यास कैलास चन्द्र सुयाल जी ने इस शुभ अवसर पर नानतिन महाराज तथा उनके शिष्य शंकर महाराज जी के व्यक्तित्व, कृतित्व के साथ साथ कुमाऊं अंचल के अनेक संतों के स्मरण तथा रोचक घटनाओं की महत्वपूर्ण जानकारी श्रृद्धालुओं के साथ सांझा की।
इस शुभ अवसर पर आज मौसम ठीक होने के फलस्वरूप भारी संख्या में मातृशक्ति द्वारा इस श्रीमद् देवी भागवत कथा कथा का आनन्द लिया गया।
इस कार्यक्रम को सफल बनाने में हरि शंकर काण्डपाल, महेश जोशी, नवीन क्वीरा, आरती भगत तथा अनेक श्रद्धालु भक्तों ने सहयोग प्रदान किया जा रहा है।