कर्म और फल” पर गोष्ठी संपन्न कर्म ही जीवन का आधार है -योगाचार्य अनिता रेलन

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नैनीताल l केंद्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में “कर्म और फल” विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया I यह कोरोना काल से 590 वाँ वेबिनार था।
योगाचार्या अनिता रेलन ने कहा कि कर्म ही मनुष्य के जीवन का आधार है अतः निष्कामभाव से कर्म करते रहना चाहिए।व्यक्ति जब फल की इच्छा करता है तो आसक्ति,राग,द्वेष उत्पन्न होता है। उन्होंने कहा कि हमें अपने अन्दर मोह नहीं पैदा होने देना चाहिए, जब हमारे हाथ से कोई अच्छा काम होता है तो हमें बड़ी शांति मिलती है संतोष मिलता है प्रसन्नता मिलती है और हमारे हाथ से अगर कोई गलत काम हो जाता है तो मन अंदर से उथल- पुथल होने लग जाता है हमें हर हाल में संतुष्ट रहना होगा।लाभ में सुख नहीं और हानि में दुख नहीं। ऐसे स्थिर रहने पर ही कर्म के प्रति आसक्ति ना होना ही संभव है अधिकांश लोग सत्कर्म का हिसाब रखते हैं पर यह उचित नहीं है अगर दाहिने हाथ से कुछ दिया गया है तो बाएं हाथ को पता भी नहीं चलना चाहिए गीता के तीसरे और पांचवें अध्याय को संक्षिप्त में बताते हुए कहा कि मनुष्य को कर्म किस प्रकार करना चाहिए?कौन से कर्म करने चाहिए? सच्चा कर्म किसे कहते हैं यही नहीं तीसरे अध्याय के पांचवें श्लोक में भी कहा गया है कोई भी व्यक्ति एक क्षण भी कर्म करे बिना नहीं रह सकता यह बहुत स्पष्ट रूप से बताया गया है जो वाणी को रोकता है मन में किसी को गाली देता है वह निष्कर्म नहीं है मतलब कर्म तो वह कर ही रहा है ना उसे मिथ्याचारी कहा जाता है मन पर अंकुश आता ही नहीं शरीर को रोके बिना, परंतु शरीर के साथ-साथ मन को अंकुश में रखने का प्रयत्न होना ही चाहिए जब मन को अंकुश में रख लेते हैं तो मनुष्य शरीर द्वारा कर्मेंद्रिय द्वारा कुछ ना कुछ तो करेगा ही ना परंतु जिसका मन अंकुश में है उसके कान दूषित बातें नहीं सुनेंगे वरन ईश्वर भजन सुनेंगे सत पुरुषों की वाणी सुनेंगे इसी में आगे चलते हुए श्री कृष्ण अर्जुन से जब कहते हैं तो नित्य कर्म कर कर्म न करने से कर्म करना अधिक अच्छा है।उन्होंने आगे बताया कि मनुष्य के तीन गुण है तीन वृत्तियां हैं उनमें रजोगुण तमोगुण और सतोगुण ऐसा गीता के 14 वें अध्याय में भी कहा गया है सतोगुण कर्म योग से संन्यास व सुख उत्पन्न होता है रजोगुण कर्म लोभ पैदा करता है,लोभ को लेकर जो मनुष्य कर्म करता है उन कर्मों का फल दुख होता है।तमोगुण अज्ञान और आलस पैदा करता है।उपरोक्त या एक दूसरे को दबाकर ही बढ़ते हैं सतोगुण से युक्त कर्म करने वाला मोक्ष प्राप्त करता है रजोगुण में करने वाला कर्म में बना रहता है फिर जन्म लेता है तमोगुण नीच बनता है और जन्म लेता है जो सत्व रज्व तम को जान लेता है और सुख में सुखी और दुख में दुखी नहीं होता वह जन्म मरण रोग व बुढ़ापा आदि दुखों से छूट जाता है
अतः हमें अपने अंतर्मन के कूड़े को साफ करते रहना चाहिए और वह कूड़ा क्या है काम क्रोध लोभ मोह मद अपने कर्म के स्रोत को निर्मल करो उसे सबके हित के लिए समर्पित करो कर्तापन की भावना और अहम से बच्चो फल की आकांक्षा ना करो हमारे भीतर आनंद का ऐसा सागर उमड़ेगा जो हमें सुखी करेगा। मुख्य अतिथि आर्य नेत्री पूजा सलूजा व अध्यक्ष नीलम आर्य ने भी अपने विचार व्यक्त किए। परिषद अध्यक्ष अनिल आर्य ने कुशल संचालन किया व राष्ट्रीय मंत्री प्रवीण आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया। गायिका सुनीता बुगा, प्रवीना ठक्कर, रविन्द्र गुप्ता, उषा मदान, राजश्री यादव, उषा सूद, कमलेश चांदना,सुषमा गोगलानी आदि के मधुर भजन हुए।

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