दिनांक ३० अगस्त २०२५ संस्कृति अंक।आलेख बृजमोहन जोशी।”गंवरा मैसर अनुष्ठान “

नैनीताल l रूसी गांव में पिछले लगभग ७० वर्षों से श्रीमती देवकी देवी पत्नी स्वर्गीय श्री लछम सिंह बिष्ट के आवास पर आरम्भ हुआ अब इस आयोजन को उसी प्रकार उनके सुपुत्र श्री नन्दन सिंह बिष्ट तथा बहू श्रीमती गीता बिष्ट अपनी सास देवकी देवी के साथ स्थानीय महिलाओं के सहयोग से लगातार करती आ रहीं है।
लोक संस्कृति में गंवरा मैसर अनुष्ठान का आयोजन किया जा रहा है।
आज अमुक्ता भरण सप्तमी के दिन स्थानीय महिलाओं के द्वारा गंवरा मैसर व बाला कि मूर्तियों का निर्माण किया गया तथा आचार्य श्री मोहन चंद तिवारी जी द्वारा इस अनुष्ठान को विधिवत रूप से करवाया गया।
कुमाऊं अंचल में गंवरा मैसर अनुष्ठान की तैयारी भादों माह की पंचमी से हो जाती है।इस पंचमी को स्थानीय भाषा में बिरुड़ पंचमी के नाम से जाना जाता है।बिरूड़ पंच अनाजों के लिए दिया गया स्थानीय शब्द है। यहां के पंचांग में भी इसे बिरुड़ पंचमी कहा जाता है।घर के आंगन में गंवरा के जन्म से लेकर ससुराल जाने तक के लोक गीत खेले जाते हैं।
सास कहती हैं – ल्याओ रे चेलियों कुकुरी माकुरी को फूल,
बहू कहतीं है – कसिकै ल्यू इजु कुकुरी माकुरी को फूल, गहरी छू गंगा चिफलो छ बाटो।
संतान की प्राप्ति व अटल सुहाग की कामना से यह अनुष्ठान किया जाता है। महिलाओं के द्वारा गले में दूब घास का दूबड़ा व डोर धारण कि जाती है।दूब घास का दूबड़ा पहने के पिछे लोक मान्यता है कि – दूब घास के एक टुकड़े को लगाने पर वह बड़ी तिब्रता के साथ फैलती है उसी तरह परिवार के फूलने फलने की मंगलकामना से यह व्रत किया जाता है।
डिकर शैली में गंवरा मैसर व बाला कि मूर्तियों का निर्माण करने में सपना, वन्दना,नैना, अंजलि, गीता बिष्ट, चन्द्रा खनी।
तथा इस अनुष्ठान में श्रीमती गीता बिष्ट, ममता बिष्ट,दीपा बिष्ट, चन्द्रा खनी,तारा मेहरा, विमला मेहरा, कांता मेहरा,प्रेमा बिष्ट,राधा बिष्ट,निधि बिष्ट, गंगा बिष्ट,कमला बिष्ट,दीपा बिष्ट,धना बिष्ट, नारायणी, दीपिका,पूनम, विद्या गैला कोटी, लता जोशी, गंगा मेहरा,प्रेमा बिष्ट, चेतना बिष्ट ने सहभागिता की।
इस अनुष्ठान को सफल बनाने में नन्दन सिंह बिष्ट, गोविन्द सिंह बिष्ट, गोपाल सिंह बिष्ट द्वारा विशेष सहयोग दिया गया।
