प्रकृति के वरदानों के प्रति कृतज्ञता व्यक्त करती है ” हर काली पूजा”आलेख बृजमोहन जोशी ।


आज समूचे कुमाऊं अंचल में मनाया जा रहा है हर काली पूजन। प्रकृति के द्वारा मानव को दिए गए वरदानों के प्रति कृतज्ञता प्रकट करने के कुमाऊं वासियों के अपने तरीके हैं। इन्हीं में से एक है “डिकर पूजा” अर्थात हर काली पूजा। खासतौर पर हमारे पर्वतीय ग्रामीण अंचलों में यह लोक परम्परा आज भी जीवित हैं।डिकर वास्तव में मिट्टी से बनी देवी देवताओं की मूर्तियां हैं जो तीन आयाम की अथवा सपाट आधार पर उभारों द्वारा बनाई जाती हैं। और हर काली पूजा के दिन इनका पूजन होता है आज दिन मंगलवार दिनांक
१५ जुलाई को हर काली पूजन मनाया जा रहा है तथा कल दिन बुधवार दिनांक १६ जुलाई को ऋतु परिवर्तन का पर्व हरेला अर्थात कर्क संक्रान्ति का लोक पर्व सम्पूर्ण उत्तराखण्ड में मनाया जायेगा। हरेला उत्तराखण्ड का प्रमुख त्यौहार होने के साथ साथ यहां की संस्कृति का का भी एक अभिन्न अंग है।इस त्यौहार का सम्बन्ध सामाजिक सोहार्द के साथ साथ कृषि व ऋतु परिवर्तन से भी है। आप सभी महानुभावों को हरेला पर्व की हार्दिक बधाई व बहुत बहुत व शुभकामनाएं।

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