नव विक्रमी संवत का महत्व पर गोष्ठी संपन्न भारतीय संस्कृति, की पहचान विक्रमी संवत से है-आचार्य श्रुति सेतिया

नैनीताल l केन्द्रीय आर्य युवक परिषद के तत्वावधान में ” नववर्ष विक्रमी संवत ” विषय पर ऑनलाइन गोष्ठी का आयोजन किया गया I य़ह करोना काल 707 वाँ वेबीनार था I वैदिक विदुषी आचार्य श्रुति सेतिया ने कहा कि हिंदू नव वर्ष का आरंभ चैत्र शुक्ल प्रतिप्रदा से होता है । वसंत ऋतु के आगमन का संकेत मिलता है और वातावरण खुशनुमा एहसास कराता है । ब्रह्म पुराण के अनुसार सृष्टि का आरंभ इसी दिन हुआ था । संवत्सर चक्र के अनुसार सूर्य इस ऋतु में अपने राशि चक्र की प्रथम राशि मेष में प्रवेश करता है । भगवान श्री राम का राजभिषेक, नवरात्र स्थापना, गुरु अंगददेव प्रगतोत्सव, आर्य समाज स्थापना दिवस, संत झूलेलाल का जन्मदिवस, युगाबद संवत्सर का प्रथम दिन से सब नववर्ष के ऐतिहासिक महत्व को दर्शाते हैं ।आधुनिक सभ्यता की आंधी दौड़ में समाज का एक वर्ग इस पुण्य दिवस को विस्मृत कर चुका है । आवश्यकता है इस दिन के इतिहास जे बारे में जानकारी लेकर प्रेरणा लेने का कार्य करें । भारतीय संस्कृति की पहचान विक्रमी संवत् से है, न कि अंग्रेजी नव वर्ष से । हम अपनी संस्कृति और वीरों के बलिदानों को ना भूलें । अभी भी समय है सब को मिलजुल कर प्रयास करना चाहिए ताकि हम अपनी भारतीय संस्कृति को संरक्षित रखने के लिए एक जुट हो । आओ हम हिन्दू नव वर्ष को धूम धाम से मनाएं और आपसी भाईचारे और प्रेम को विश्व भर में ले जाए ।
मुख्य अतिथि आर्य नेत्री कृष्णा पाहुजा व अध्यक्ष अनिता रेलन ने भारतीय संस्कृति की महत्ता पर विचार .I
परिषद अध्यक्ष अनिल आर्य ने कुशल संचालन किया और प्रदेश अध्यक्ष परवीन आर्य ने धन्यवाद ज्ञापन किया I गायिका प्रवीना ठक्कर , जनक अरोड़ा, कमला हंस , सुनीता अरोड़ा .सुदर्शन चौधरी प्रतिभा कटारिया आदि के मधुर भजन हुए I



