नगर की यातायात व्यवस्था को लेकर जनहित संस्था ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सोपा

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नैनीताल। नगर की जनहित संस्था ने जिलाधिकारी को एक ज्ञापन सौंप कर कहा है कि आए दिन नैनीताल नगर में वाहनों की मार्ग पर कतार लगने से जाम की स्थिति आए दिन बन जाती है और आए दिन समाचार पत्रों से यह विदित होता है कि, वाहनों की जाम की स्थिति को समाप्त करने के लिए अधिक से अधिक पार्किग स्थलों के स्थान चिन्हित किया जाये। इस सम्बन्ध में जनहित संस्था नैनीताल का यह तर्क है कि अधिक पार्किंग बनाने से जाम की स्थिति समाप्त नही हो सकती, नैनीताल नगर का क्षेत्रफल लगभग 1.1/2 किलोमीटर का है संस्था ने नगर पालिका नैनीताल के बाइलौज का अध्यन करने पर यह पाया कि नगरपालिका का उद्देश्य यह था कि तल्लीताल स्टेशन से मल्लीताल क्षेत्र में कम से कम वाहनों का आवगमन हो। तल्लीताल से मल्लीताल का मार्ग एक सम्वेदनीशील मार्ग होने के कारण पालिका ने जो वाहन तल्लीताल से मल्लीताल जाएगी उसके लिए जुर्माने की राशि निर्धारित की थी ताकि सम्बधित मार्ग पर वाहनों का आवागमन कम हो सके। परन्तु बड़े दुर्भाग्य की बात है कि नगर पालिका परिषद ने इस जुर्माने की राशि को पालिका की आय में परिवर्तित कर दिया है जिसके कारण वर्तमान में वाहनों का दबाव बड़ता जा रहा है पालिका द्वारा इन वाहनों से लेक प्रेज टैक्स के नाम पर पैसा वसूल कर रही है जबकि नगर पालिका का मुख्य कार्य नगर की साफ सफाई की व्वस्था है ताकि जनता को गन्दगी से राहत मिल सके। प्रदेश सरकार ने करों की वसूली के लिए परिवहन, आबकारी एवं बिकीकर विभाग बनाये गए है। अताः संस्था को सक्षिप्त रूप में यह निवेदन करना है कि नैनीताल नगर में अधिक से अधिक पार्किंग बनाकर जाम की स्थिति कदापि समाप्त नंही हो सकती जब तक कि नैनीताल नगर में आने वाले वाहनो का दबाव कम नही किया जायेगा और यदि इस विषय पर गम्भीरतापूर्वक द्वारा विचार नही किया गया तो आने वाले समय में उत्तराखण्ड राज्य के पर्वतीय क्षेत्र की स्थिति भी हिमाचल प्रदेश की तरह बन जायेगी। इस सम्बन्ध में सार्वजनिक निर्माण विभाग द्वारा जहाँ पर भी मार्गों का चौड़ीकरण किया जाता है उस स्थान पर पालिका तुरन्त पार्किंग बना देती है जो कदापि उचित नही है पालिका द्वारा स्थानीय वाहनों को पार्किंग के लिए कोई भी उपयुक्त स्थान अभी तक चयनित नही किया गया है इस प्रकरण पर कृपया नगरपालिका नैनीताल को उचित कार्रवाही हेतु निर्देशित करने कष्ट करें।

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