कुमाऊं –गढ़वाल की संस्कृति के संगम रानीबाग में उमड़ा श्रद्धा का सैलाब, ब्लॉक प्रमुख एवं स्थानीय जनप्रतिनिधियो ने श्रद्धालुओं को किया माघ खिचड़ी भोज का वितरण, भाबर–पहाड़ के संगम रानीबाग में उमड़ा श्रद्धालुओं का सैलाबडॉo हरीश सिंह बिष्ट

नैनीताल l उत्तरायणी/मकर संक्रांति के पावन अवसर पर रानीबाग स्थित जिया रानी शीला ,गुफा और चित्रशिला घाट पर श्रद्धालुओं ने भारी संख्या में संगम में स्नान किया और ऐतिहासिक मेले में शिरकत की।
खिचड़ी भोज और ब्लॉक प्रमुख डॉo हरीश सिंह बिष्ट ने इस अवसर पर रानीबाग और आसपास के क्षेत्रों में विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक संगठनों द्वारा ‘खिचड़ी भोज’ का आयोजन किया गया। प्रमुख डॉ बिष्ट के साथ जनप्रतिनिधियो ने श्रद्धालुओं को खिचड़ी प्रसाद वितरित किया। प्रमुख ने कहा यह पौराणिक मेला है इसे बेहतर बनाने के लिए आगामी वर्षों में बेहतर कार्य कर ताकि आने वाले श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं मिले इसके लिए प्रयास रहेगा साथ ही सभी लोगों से बुराई छोड़ अच्छाई की ओर कदम बढ़ाने के लिए संकल्प लेने की अपील की। प्रमुख ने कहा यह स्थल तराई पहाड़ का संगम है राज्य सरकार मा मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी से इस मेले को भव्य ओर सुव्यवस्थित बनाने के लिए सुविधाओं की मांग करेंगे। ताकि यह मेला भी बागेश्वर की तर्ज पर आयोजित हो मकर संक्रांति उत्तरायणी पर भारी संख्या में आए श्रद्धालुओं ने जनेऊ संस्कार भी कराए
रानीबाग का यह मेला कुमाऊंनी संस्कृति की प्रतीक रानी जिया (जिन्हें ‘कुमाऊं की लक्ष्मी बाई’ भी कहा जाता है) की स्मृति में आयोजित होता है। यहाँ श्रद्धालु जिया रानी की गुफा के दर्शन करते हैं। कुमाऊं और गढ़वाल के कत्यूरी वंशज रानीबाग चित्रशिला धाम में अपनी कुलदेवी जियारानी के दर्शन कर उनकी याद में रात भर पूजा कर जागर लगाई।कुमाऊं और गढ़वाल के विभिन्न हिस्सों से रानीबाग स्थित चित्रशिला धाम पहुंचे कत्यूरी वंशजों ने मंगलवार शाम अपनी आराध्या और कुलदेवी जियारानी की गुफा के दर्शन किए। इसके बाद उनकी याद में रात भर पूजा कर जागर लगाई। कत्यूरियों ने मसकबीन, ढोल, दमाऊं, नगाड़ा और थाली की धुन के साथ जियारानी की वीरगाथा का गान किया। रानीबाग में कुमाऊं और गढ़वाल के विभिन्न हिस्सों से कत्यूरी वंशज हर साल जागर के लिए पहुंचते हैं। इस बार भी रानीखेत, कोटाबाग, सल्ट, चौखुटिया, रामनगर और गढ़वाल मंडल से कत्यूरी वंशज जय जियारानी के उद्घोष के साथ दोपहर से ही दलों में पहुंचने शुरू हो गए थे। गार्गी नदी में स्नान के बाद उन्होंने जियारानी का ध्यान लगाया। शिक्षक दीपक नौगाई बताते हैं कि चंदवंश से पहले कत्यूर वंश का शासन था। कुमाऊं में सूर्यवंशी कत्यूरियों का आगमन सातवीं सदी में अयोध्या से हुआ था। इतिहासकार इन्हें अयोध्या के सूर्यवंश राजवंश शालिवान का संबंधी मानते हैं जबकि कुछ लोग कुलिंद या खस मूल का मानते हैं।इस अवसर पर ग्राम प्रधान कलावती थापा, जया बोहरा,महेश भंडारी,चंदन नौगाई , रमा पांडे,आनंद कुजरवाल, भुवन लाल साह, मनीष गोनी, प्रकाश बृजवासी, महेंद्र कुमार, धीरेन्द्र बिष्ट, गोविंद नेगी, महेंद्र कुंवर आशा भंडारी, सुमन बिष्ट, तारा बिष्ट, भगवती बिष्ट, मनोज,अंजना साह, धीरेन्द्र जीना, कमल कुल्याल सहित भारी संख्या में ग्रामीण श्रद्धालु उपस्थित रहे








