खुश नहीं हैं बजट से कांग्रेसी नेता त्रिभुवन

नैनीताल l राज्य की प्रमुख चुनौतियों—प्रवास, बेरोजगारी, आपदा महिला सुरक्षा एवं प्रबंधन, पर्यटन और कृषि—पर फोकस की उम्मीद थी। बजट में ये स्पष्ट रूप से अनुपस्थित एवं अपर्याप्त होना राज्य सरकार की अदूरदर्शिता एवं असंवेदनशीलता को परिलक्षित करता है।पहाड़ी क्षेत्रों से बड़े पैमाने पर पलायन (माइग्रेशन) राज्य की बड़ी समस्या है। पूर्व-बजट में ग्रामीण आजीविका, जड़ी-बूटी खेती और स्थानीय रोजगार के लिए ₹5,000-10,000 करोड़ का अलग फंड की नितांत आवश्यकता थी, लेकिन बजट में कोई ठोस घोषणा नहीं। केवल सामान्य कृषि प्रावधान हैं, जो अपर्याप्त लगते हैं। जंगली जानवरों से कृषि को हो रही अभूतपूर्व क्षति के कारण कृषि का रकबा , विशेष कर पर्वतीय क्षेत्रों में लगभग न्यून हो चला है। इसके साथ ही साथ जंगली जानवर एवं मनुष्यों के मध्य हो रहे संघर्ष के कारण मानव जीवन में जो संकट उत्पन्न हुआ है, उस अति लोक-महत्व की विकराल समस्या के समाधान हेतु भी बजट में किसी भी प्रकार का प्रावधान न होना राज्य सरकार की असंवेदनशीलता को दर्शाता है।
युवा बेरोजगारी पर बड़ा रोजगार पैकेज: युवाओं के लिए स्किल डेवलपमेंट और सरकारी नौकरियों की उम्मीद (कम से कम 50,000 नई भर्तियां या स्टार्टअप फंड) थी। बजट में युवा सशक्तिकरण का जिक्र है, लेकिन कोई विशिष्ट योजना (जैसे टूरिज्म-लिंक्ड जॉब्स या IT हब्स के लिए अतिरिक्त फंड) नहीं दिखा। MSME और स्टार्टअप में प्रगति का उल्लेख है, लेकिन नया आवंटन स्पष्ट नहीं।
आपदा प्रबंधन और राहत कोष: 2025 की बाढ़/भूस्खलन जैसी आपदाओं के बाद ₹2,000-3,000 करोड़ का आपदा राहत फंड या जलवायु-अनुकूल इंफ्रास्ट्रक्चर की उम्मीद थी। बजट में सामान्य विकास पर फोकस है, लेकिन आपदा-विशेष प्रावधान गायब। (नाबार्ड ने ग्रामीण इंफ्रा के लिए ₹750 करोड़ घोषित किया है, लेकिन यह राज्य बजट से अलग है।)
राज्य बजट में पर्यटन का जिक्र सीमित, सुरक्षित पर्यटन विशेष कर महिला सुरक्षा के विषय गायब। बड़े इंफ्रा प्रोजेक्ट्स (जैसे रोपवे या होमस्टे सब्सिडी) के लिए अतिरिक्त फंड की कमी। पूर्व-अनुमान में ₹1,000 करोड़ की मांग थी।
किसानों के लिए MSP गारंटी या सब्सिडी वृद्धि: किसानों की आय दोगुनी करने की पुरानी मांग पर फोकस की उम्मीद, लेकिन बजट में केवल सामान्य कृषि आवंटन (9% कुल बजट)। जड़ी-बूटी/ऑर्गेनिक फार्मिंग के लिए विशेष प्रोत्साहन नहीं।
नैनीताल, मसूरी,रानीखेत, अल्मोड़ा आदि जैसे पर्यटन नगरो में पर्यटकों सहित स्थानीय लोगों हेतु पार्किंग एवं जाम की विकराल समस्या के समाधान हेतु विशेष पैकेज की दरकार थी, किंतु पूर्ण रूप से निराशा हाथ लगी।
कुल मिलाकर “सब्जबाग” दिखाने वाला यह बजट उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य के परिप्रेक्ष्य में राजनीति मात्र से प्रेरित “चुनावी बजट” अधिक एवं वास्तविकता से कोसों दूर प्रतीत होता है। सादर त्रिभुवन फर्त्याल 🙏